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Success story: 10 बार मिली असफलता, 11वीं कोशिश में रचा इतिहास, पिता की इस सीख ने आकाश को बना दिया Army Officer

कोटा के आकाश चौधरी ने Army में अफसर बनने के लिए 10 बार असफलता का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी. पिता की एक सीख से हिम्मत जुटाकर उन्होंने 11वीं बार कोशिश की और भारतीय सेना में Lieutenant बनकर अपना सपना पूरा कर लिया.

Aakash Become Army Lieutenant
चेतन गुर्जर
  • कोटा,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

कहते हैं कि असफलता इंसान को रोकती नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ने की वजह देती है. कोटा के आकाश चौधरी ने इस बात को अपनी जिंदगी में सच कर दिखाया है. Army में अफसर बनने के सपने को पूरा करने के लिए आकाश ने एक-दो नहीं, बल्कि लगातार 10 बार कोशिश की और हर बार असफल रहे. 10वीं नाकामी के बाद उनका हौसला टूटने लगा और उन्हें अपना सपना छोड़ने का ख्याल आने लगा. तभी पिता की एक सीख ने उन्हें फिर से हिम्मत दी. इसके बाद आकाश ने 11वीं बार कोशिश की और भारतीय सेना में Lieutenant के पद पर चयन हासिल कर लिया.

आठवीं कक्षा से शुरू हुआ Army का सपना
आकाश का Army से जुड़ाव बचपन से ही रहा है. कक्षा 8वीं में वह पढ़ाई के लिए घर से दूर राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, बेलगावी, कर्नाटक चले गए. इकलौते बेटे के लिए परिवार से दूर जाना आसान नहीं था. शुरुआती दिनों में उन्हें मां-पिता की बहुत याद आती थी और वह रोते भी थे. मिलिट्री स्कूल का सख्त अनुशासन, सुबह की एक्सरसाइज और तय दिनचर्या उनके लिए बिल्कुल नया था. धीरे-धीरे उन्होंने खुद को इस माहौल में ढाल लिया और Army में अफसर बनने का सपना मजबूत होता गया.

10 बार असफल हुए, फिर भी जारी रखी तैयारी
Army में अफसर बनने के लिए आकाश ने दिन-रात मेहनत की. वह रोजाना करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे. इसके बावजूद उन्हें लगातार 10 बार असफलता मिली. हर नाकामी के साथ उनका आत्मविश्वास कमजोर होता गया. 10वीं कोशिश के बाद उन्हें लगा कि शायद अब यह सपना पूरा नहीं हो पाएगा.

पिता की एक बात बनी Turning Point
आकाश के पिता नरेंद्र चौधरी भारतीय सेना में 17 साल सेवा दे चुके हैं. बेटे को निराश देखकर उन्होंने उसे चींटी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि चींटी बार-बार गिरने के बावजूद दोबारा चढ़ने की कोशिश करती है. पिता की यह बात आकाश के लिए प्रेरणा बन गई. उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की और 11वीं कोशिश में सफलता हासिल कर ली.

बेटे की सफलता से माता-पिता का सपना भी पूरा
आकाश के Lieutenant बनने के बाद परिवार की वर्षों की मेहनत और इंतजार सफल हो गया. उनके पिता फिलहाल कोटा सिटी पुलिस लाइन में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं. उन्होंने कभी बेटे पर Army में जाने का दबाव नहीं बनाया, लेकिन चाहते थे कि बेटा उनसे भी बड़ा मुकाम हासिल करे. आकाश की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बाद हार मान लेते हैं. उनकी 11वीं कोशिश साबित करती है कि मंजिल कितनी भी दूर हो, कोशिश जारी रखी जाए तो सफलता जरूर मिल सकती है.

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