पूरे विश्व में हजारों करोड़ की कालीन निर्यात करने वाले भदोही के कालीन उद्योग में अब जूट से बने कालीनों के निर्यात को नई गति मिलने जा रही है. इसके लिए भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के अधीन आने वाली जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने भदोही में अपना आउटलेट खोल दिया है. यहां से कालीन उद्यमियों को जूट से अलग-अलग तरह की कालीन बनाने और उसके लिए जूट आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा. अब भदोही में वूल और जूट मिक्सिंग से पर्यावरण के अनुकूल कालीन बनाने की उम्मीद भी जग गई है.
छह हजार करोड़ का कालीन निर्यात
गौरतलब हो कि भदोही से पूरे विश्व में लगभग छह हजार करोड़ की कालीन निर्यात किया जा रहा है. इसमें से कुछ हिस्सा जूट से बने कालीन और अन्य उत्पादों का भी है. लेकिन अभी जूट से उत्पाद बनाने में रिसर्च और रॉ मैटेरियल की कमी कालीन उद्योग को महसूस हो रहा था. लेकिन अब जूट कॉरपोरेशन इंडिया ने भदोही में अपना आउटलेट खोलकर इस कमी को पूरा कर दिया है. अब कालीन निर्माताओं और निर्यातकों को जूट यार्न, जूट ब्लेंड और अन्य जरूरी रॉ मैटेरियल एक ही स्थान पर आसानी से उपलब्ध हो सकेगा.
किसानों को होगा सीधा लाभ
इससे जूट और ऊन के मिश्रण से नए और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद विकसित करने का रास्ता भी आसान होगा. जेसीआई के मुताबिक यह आउटलेट सिर्फ कच्चा माल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जूट आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यमियों व कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगा. इससे प्राकृतिक जूट के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और जूट किसानों को भी सीधा लाभ होगा.
वहीं, कालीन निर्यातकों का मानना है कि अभी उद्योग में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश यार्न विदेशों से आयात करना पड़ता है. ऐसे में जेसीआई के भदोही आने से जूट आधारित नए उत्पाद बनाने में काफी मदद मिलेगी. इससे आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जूट किसानों के साथ-साथ भदोही के कालीन उद्योग को भी नया विस्तार मिलेगा.
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