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छोटे हाथों का बड़ा कमाल, महिलाओं की परेशानी देख बच्चों ने खुद बना डाला पुल... बगहा की कहानी बनी मिसाल

बगहा में कुछ छोटे-छोटे बच्चों ने बांस और लकड़ियां जुटाईं और अपनी मेहनत व हुनर से नदी पर चचरी पुल तैयार किया है. बच्चों ने साबित कर दिया कि समाज में बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सोच और जज्बे की जरूरत होती है.

children built a bridge
अभिषेक पाण्डेय
  • बगहा,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST

कहते हैं कि मदद करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि दिल चाहिए. बगहा में कुछ छोटे-छोटे बच्चों ने इसी बात को सच कर दिखाया है. दरअसल, नदी के तेज बहाव में ध्वस्त हो गया था. जिसके बाद नदी पार करने में महिलाओं और ग्रामीणों को हो रही परेशानी देखकर बच्चों को दुख हुआ. इसके बाद बच्चों ने खुद पहल की और नदी पर चचरी पुल बनाने का फैसला किया. छोटे-छोटे हाथों ने बांस और लकड़ियां जुटाईं और अपनी मेहनत व हुनर से नदी पर चचरी पुल तैयार कर दिया.

महिलाओं की परेशानी देखकर बच्चों ने लिया फैसला
नदी में पानी होने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही थी. खासकर महिलाओं और बच्चों को नदी पार करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. कई बार लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता था. इसी दौरान बच्चों ने महिलाओं को परेशान होते देखा. छोटी उम्र के इन बच्चों को यह बात अच्छी नहीं लगी. बच्चों ने आपस में बातचीत की और तय किया कि अगर यहां से गुजरने में लोगों को परेशानी हो रही है तो क्यों न अपने स्तर से कोई रास्ता बनाया जाए.

बांस और लकड़ियां जुटाकर शुरू किया काम
इसके बाद बच्चों ने नदी पर चचरी पुल बनाने की तैयारी शुरू कर दी. बच्चों ने स्थानीय स्तर पर बांस और लकड़ियां जुटाईं. किसी ने बांस लाने में मदद की तो किसी ने उसे काटने और जोड़ने का काम किया. बच्चों ने मिलकर नदी के ऊपर बांस-लकड़ी से चचरी पुल तैयार किया. कई घंटे की मेहनत के बाद जब पुल बनकर तैयार हुआ तो ग्रामीणों की परेशानी कुछ हद तक कम हो गई.

छोटे हाथों का बड़ा हुनर
जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद में अपना समय बिताते हैं, उसी उम्र में इन बच्चों ने लोगों की परेशानी को समझते हुए समाधान निकालने की कोशिश की. बच्चों की इस पहल ने ग्रामीणों को भी प्रभावित किया है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों ने जो काम किया है, वह बेहद सराहनीय है. बच्चों ने किसी का इंतजार नहीं किया और न ही सिर्फ समस्या की शिकायत की, बल्कि खुद आगे बढ़कर समाधान की कोशिश की.

चचरी पुल से ग्रामीणों को मिली राहत
चचरी पुल तैयार होने के बाद नदी पार करने वाले ग्रामीणों को काफी राहत मिली है. अब लोग इस पुल के सहारे नदी पार कर पा रहे हैं. खासकर महिलाओं के लिए यह पुल काफी मददगार साबित हो रहा है. हालांकि, चचरी पुल स्थायी समाधान नहीं है. पानी का बहाव बढ़ने या तेज बारिश होने पर पुल को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में ग्रामीणों को एक मजबूत और स्थायी पुल की जरूरत है.

बच्चों की पहल को कांग्रेस नेता जय सिंह ने सराहा
बच्चों की इस सराहनीय पहल की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस नेता जय सिंह मौके पर पहुंचे. उन्होंने बच्चों से मुलाकात कर उनकी मेहनत और जज्बे की सराहना की. जय सिंह ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में बच्चों ने जिस तरह महिलाओं और ग्रामीणों की परेशानी को समझा और उसका समाधान निकालने के लिए खुद आगे आए, यह काबिल-ए-तारीफ है. उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है. बच्चों की सोच और दूसरों की मदद करने की भावना निश्चित रूप से प्रेरणादायक है. सम्मान मिलने से बच्चों का उत्साह भी बढ़ा.

स्थायी पुल की उठी मांग
बच्चों की पहल के बाद अब ग्रामीणों को प्रशासन से भी उम्मीद है. ग्रामीणों का कहना है कि चचरी पुल से तत्काल राहत तो मिली है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नदी पर मजबूत पुल का निर्माण जरूरी है. ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले और यहां जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात के दिनों में लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े.

बच्चों ने दिया इंसानियत का बड़ा संदेश
बगहा की यह कहानी सिर्फ एक चचरी पुल बनाए जाने की कहानी नहीं है. यह उन बच्चों की संवेदनशील सोच की कहानी है, जिन्होंने दूसरों की परेशानी को अपनी परेशानी समझा. इन नन्हे हाथों ने बांस और लकड़ियों से भले ही एक छोटा सा पुल बनाया हो, लेकिन इस पुल ने लोगों के दिलों को जरूर जोड़ दिया है. बच्चों ने साबित कर दिया कि समाज में बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सोच और जज्बे की जरूरत होती है.

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