एक बच्चे की याद में 18 साल से मुफ्त इलाज, मनीषा कोइराला की पहल 'जीवन की सौगात' बनी हजारों जिंदगियों के लिए उम्मीद

मुंबई के अंधेरी इलाके में पिछले 18 सालों से 'जीवन की सौगात' नाम का एक मेडिकल कैंप हजारों लोगों की जिंदगी में उम्मीद की किरण बन रहा है. इस मुहिम की शुरुआत एक छोटे बच्चे 'सौगात' की याद में हुई थी, जिसे बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला नेपाल से इलाज के लिए मुंबई लाई थीं.

जीवन की सौगात, मुंबई
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

मुंबई से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो दिल को छू लेने के साथ इंसानियत की मिसाल भी पेश करती है. यहां एक छोटे बच्चे 'सौगात' की याद में हर साल हजारों लोगों का फ्री मेडिकल चेकअप और इलाज किया जाता है. इस पहल के जरिए अब तक दस हजार से ज्यादा लोग बिना किसी खर्च के इलाज का फायदा उठा चुके हैं.

एक बच्चे की कहानी से शुरू हुई पहल
दरअसल, करीब अठारह साल पहले नेपाल से 'सौगात' नाम का एक बच्चा कैंसर के इलाज के लिए मुंबई लाया गया था. उसे बॉलीवुड एक्ट्रेस मनीषा कोइराला यहां लेकर आई थीं. मुंबई में करीब छह महीने तक उसका इलाज चला, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. इसी घटना के बाद उसके नाम पर हर साल यह सेवा शुरू की गई.

अंधेरी में हर साल लगता है फ्री मेडिकल कैंप
मुंबई के अंधेरी इलाके में हर साल इस मेडिकल कैंप का आयोजन किया जाता है. यहां लोगों का मुफ्त में चेकअप और इलाज किया जाता है. इस सेवा को 'जीवन की सौगात' नाम दिया गया है, जो आज एक बड़ी मुहिम बन चुकी है.

इस कैंप की खास बात यह है कि इसमें मुंबई के कई बड़े डॉक्टर अपनी सेवाएं मुफ्त में देते हैं. यहां अत्याधुनिक मशीनों के जरिए जांच की जाती है. इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ और दवाइयों की भी पूरी व्यवस्था रहती है, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो.

हर उम्र के लोगों को मिल रहा फायदा
इस मेडिकल कैंप में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. यहां सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि शरीर से जुड़ी हर तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है. पिछले अठारह सालों से यह सिलसिला लगातार जारी है और हर साल हजारों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं.

इंसानियत की मिसाल बनी 'जीवन की सौगात'
यह पहल सिर्फ एक मेडिकल कैंप नहीं, बल्कि इंसानियत की एक मिसाल बन चुकी है. एक बच्चे की याद में शुरू हुआ यह काम आज हजारों लोगों के लिए उम्मीद बन गया है. सच में, इससे बेहतर कोई गुड न्यूज शायद ही हो सकती है, जहां एक दर्दनाक घटना को लोगों की भलाई में बदल दिया गया हो.


(रिपोर्ट- धर्मेंद्र दूबे)

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