Farmers success story: सरकारी योजनाओं का मिला साथ, पारंपरिक खेती छोड़ कर रहे इस चीज की बागवानी, केंद्र सरकार की योजनाओं ने बदली किसानों की जिंदगी...

महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाला गांव में किसानों ने केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं का लाभ लेकर पारंपरिक खेती से बागवानी की ओर कदम बढ़ाया है. मौसंबी, आम और सीताफल की खेती से बेहतर आमदनी हो रही है. पीएम-किसान, कुसुम, ड्रिप सिंचाई और बागवानी योजनाओं ने किसानों की आय और जीवनशैली में बदलाव लाया है.

jalna farmers success story
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:16 PM IST

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव को सामने लाया जा रहा है. महाराष्ट्र के जालना जिले का अंतरवाला गांव भी इसकी एक मिसाल बनकर उभरा है, जहां कई किसानों ने केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं का लाभ लेकर अपनी खेती को नई दिशा दी है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कुसुम सोलर योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने इन किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनकी जीवनशैली में भी बड़ा बदलाव लाया है.

संताजी भोईटे ने पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई बागवानी
जालना तहसील के अंतरवाला गांव के किसान संताजी भोईटे के पास करीब साढ़े पांच एकड़ जमीन है. पहले वे पारंपरिक रूप से सोयाबीन और कपास की खेती करते थे, लेकिन उन्हें विकसित भारत जी राम जी (पुरानी मनरेगा) योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने योजना का लाभ लेकर मौसंबी का बाग लगाया. सरकारी अनुदान के कारण उन्हें तीन वर्षों तक आर्थिक सहायता मिली और बाग लगाने में हुआ लगभग पूरा खर्च वापस मिला.

आज उनके खेत में मौसंबी, आम और सीताफल के बाग हैं. अकेले एक एकड़ मौसंबी के बाग से उन्हें लगभग आठ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है. संताजी भोईटे ने कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत ट्रैक्टर लिया, राष्ट्रीय बागवानी मिशन से खेत तालाब बनवाया और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई लगाई. इसके अलावा पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत हर तीन महीने में मिलने वाली दो हजार रुपये की सहायता खेती के लिए खाद और दवाइयां खरीदने में काम आती है. मिट्टी परीक्षण योजना का लाभ मिलने से उन्हें फसल के अनुसार संतुलित उर्वरकों के उपयोग की जानकारी भी मिली.

संताजी भोईटे, किसान, जालना
इसी गांव के किसान भरत शिंदे भी केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं. पांच एकड़ खेती वाले भरत शिंदे ने प्रधानमंत्री कुसुम सोलर योजना के तहत सोलर पंप लगवाया. पहले बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण रात में सिंचाई करना कठिन था, लेकिन अब वे जरूरत के अनुसार दिन और रात दोनों समय खेतों को पानी दे पा रहे हैं.

उन्होंने विकसित भारत जी राम जी (पुरानी मनरेगा) योजना के तहत मौसंबी और सीताफल के बाग लगाए हैं, जिनसे अब उत्पादन शुरू होने वाला है. ड्रिप सिंचाई के कारण पानी की बचत हो रही है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है. भरत शिंदे को पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है. साथ ही मिट्टी परीक्षण के बाद मिले सॉइल हेल्थ कार्ड से उन्हें खेत में आवश्यकतानुसार उर्वरकों का उपयोग करने में मदद मिल रही है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी है. वे बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में सरकारी योजनाओं ने उनकी खेती और आर्थिक स्थिति दोनों को मजबूत किया है.

लाखों किसानों तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ
जालना के जिला कृषि अधीक्षक गहिनीनाथ कापसे के अनुसार, जिले में केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का बड़े पैमाने पर लाभ किसानों तक पहुंच रहा है. उनके मुताबिक, पीएम-किसान योजना से जिले के करीब तीन लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से तीन से साढ़े तीन लाख किसान जुड़े हुए हैं. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत लगभग 20 हजार किसानों ने ड्रिप सिंचाई अपनाई है, जिससे जल संरक्षण के साथ फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है. इसके अलावा कृषि यंत्रीकरण, कुसुम सोलर योजना और मृदा परीक्षण जैसी योजनाओं का लाभ भी बड़ी संख्या में किसान उठा रहे हैं.

योजनाओं ने दिखाई खेती में बदलाव की राह
जालना के अंतरवाला गांव के इन किसानों की कहानी यह बताती है कि यदि सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और उनका प्रभावी उपयोग किया जाए, तो पारंपरिक खेती को भी लाभकारी बनाया जा सकता है. केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर भी अग्रसर किया है. प्रधानमंत्री मोदी सरकार के 12 वर्षों के अवसर पर जालना की यह केस स्टडी ग्रामीण भारत में कृषि परिवर्तन की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है.
 

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