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International Women's Day: महिलाएं कैसे बनीं देश की लाइफ लाइन का हिस्सा, हजारों जिंदगियों की सुरक्षा होती हाथ में.. जानिए खास महिलाओं की कहानी

आज के युग की महिला किसी भी फील्ड में पुरुषों से पीछे नहीं रहती हैं. फिर चाहें वह कोई भी काम हो या किसी भी प्रकार का काम हो. आज की महिला राजनीत में भी बड़े से बड़े पद पर काम कर रही है.

gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 8:57 AM IST

21वीं सदी की नारी घर का चूल्हा-चौका ही नहीं बल्कि देश समाज में अहम योगदान दे रहीं हैं. आज के युग की नारी कई ऊंचे पदों पर काम कर रहीं हैं. साथ ही दौरान वह घर के काम को भी संभाल रही हैं. आज विश्व महिला दिवस है. 

आज हम आपको प्रयागराज की ऐसी 3 महिलाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जो रेलवे डिपार्टमेंट में लोको पायलट पद पर तैनात है. साथ ही यह तीनों महिलाएं बखूबी से अपने काम कर रही हैं. इनका काम केवल गाड़ी चलाना नहीं बल्कि उसमें बैठीं हजारों ज़िदगियों को सुरक्षित रखना भी है. 

देश की लाइफ लाइन का हैं हिस्सा
रेनू देवी, प्रयगराज रेलवे स्टेशन पर लोको पायलट सेंटर के काम को संभाल रही हैं. जिसमें उन्हें ट्रेन को लेकर आने वाले लोको पायलट के इंजन मे आई खराबी को देखना. उसे आगे तक जाने के लिए दोबारा तैयार करने की ज़िम्मेदारी को उठाना. सब अकेले संभालना होती है. 

रेनू ने घर वालों की मर्जी के बिना एक लड़के से शादी कर की थी. उस समय रेनू के पास कोई जॉब नहीं थी. उनकी सफलता में उनके पति का काफी बड़ा हाथ है. अब रेनू देवी रेलवे की नौकरी के दौरान ट्रेन की पायलट सीट पर बैठ कर न सिर्फ अपने परिवार को बखूबी चला रही है बल्कि देश की लाइफ लाइन कही जाने वाली भारतीय रेल का हिस्सा हैं.

रेनू देवी के मुताबिक एक महिला होने के नाते लोको पायलट होना एक चैलेंजिंग जॉब है. लेकिन जब आप हिम्मत के साथ मजबूत इरादे लेकर आगे बढ़ते है तो हर मुश्किल काम बेहद आसान बन जाता है. 

लोगों को देना है जवाब
वहीं एक और लोको पाइलट हैं, जिनका नाम मनाली पटेल है. यह एनसीआर रीजन मे लोको पाइलट के पद पर काम करती हैं. मानाली साल 2021 में रेलवे की महिला लोको पायलट बन रेलवे डिपार्टमेंट को अपनी सेवाएं दे रही हैं. वह कहती हैं कि कुछ लोग इस जॉब को महिलाओं के लिए आसान नहीं मानते हैं. उनका कहना है कि वह लोगों को दिखाना चाहती है कि महिलाएं भी यह जॉब कर सकती हैं. 

पति का साथ बनाता है काम आसान
सुनीता भी एक लोको पायलट हैं. वह 2020 में प्रयागराज रेलवे स्टेशन ट्रांसफर लेकर जॉइन किया है. सुनीता ने बताया कि वे 10 -12 साल से वह नौकरी में हैं. नौकरी के दौरान जब ड्यूटी आवर ज्यादा होता है तो कभी कभी लगता है कि कहां आकर फंस गए. लेकिन जितना ज्यादा काम उतना आराम भी मिलता है.

घर मे पति व परिवार का पूरा सहयोग उनकी नौकरी के चैलेंज को आसान बना देता है. आज के बदलते माहौल में जब एक महिला को लोग लोको पर चढ़ा हुआ देखते हैं. तो वह जिस निगाह से आपको देखते है, वह बहुत प्राउड मोमेंट होता है.

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