GNT DIGITAL EXCLUSIVE: ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के हो रहे हैं शिकार, ऐसे लें कानूनी मदद

ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के मामले इन दिनों तेजी से बढ़े हैं. लोगों के गलत तरीके से एडिटेड वीडियोज उतार लिए जाते हैं, जिसके बाद उन्हें वायरल करने की धमकी दी जाती है. ऐसे मामलों में तत्काल पुलिस के पास जाने से आपकी परेशानियां कम हो सकती हैं.

ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का शिकार हो रहे हैं बड़ी संख्या में लोग (प्रतीकात्मक तस्वीर- रॉयटर्स)
अभिषेक शुक्ल
  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 1:09 PM IST
  • हाल के दिनों में बढ़े हैं ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के मामले
  • मॉर्फ्ड वीडियोज बनाकर की जा रही है लोगों से ठगी
  • ब्लैकमेल होने से पहले तत्काल पुलिस को दें सूचना

अगर आपके मैसेंजर में कोई एक अनजान लड़की मैसेज ड्रॉप करती है कि 'हाय!' तो आप क्या करेंगे. जाहिर है कि जवाब देंगे. आपके मैसेज के जवाब में एक सवाल लड़की दागती है कि आप कहां से हैं? जवाब में आप अपना लोकेशन बता देते हैं. फिर आपसे पूछा जाता है कि आप क्या काम करते हैं? जवाब में लड़की आपका प्रोफेशन पूछ लेती है. आप सामान्य बातचीत की तरह प्रोफेशन भी बता देते हैं. 

तभी अचानक से एक मैसेज ड्रॉप होता है कि वीडियो कॉल पर मेरे संग सेक्स करोगे? आपका जवाब क्या होगा? शॉकिंग है न?

हर कोई आपकी तरह समझदार नहीं है कि ऐसे मैसेज भेजने वाले को इग्नोर कर दे. कुछ लोग नासमझ भी होते हैं. वीडियो कॉल का ऑफर ठुकराते नहीं, बल्कि कॉल पर क्लिक कर देते हैं.

वीडियो कॉल पर क्लिक करने के बाद चैटिंग शुरू हो जाती है. आपका मोबाइल नंबर ले लिया जाता है. ट्रैप में फंसे आदमी से लड़की कपड़े उतारने को कहती है. अगर उसने कपड़े उतार दिए तो भी उसे फंसना है, न उतारे तो भी उसे फंसना ही है. वीडियो चैटिंग की ड्युरेशन अगर 1 मिनट की भी हो तो भी वीडियो 3-4 मिनट का तैयार हो जाता है. चैटिंग क्लोज कर दी जाती है.

फिर अगले दिन या थोड़ी देर बाद एक कॉल आती है. कॉल करने वाला शख्स खुद को पुलिस का बड़ा अधिकारी बताता है. कॉल करने वाला शख्स बेहद सख्त लहजे में डांटता है. वह कहता है कि आपने पॉर्न वीडियो बनाया है. आप किसी का ऑनलाइन सेक्सुअल हरसमेंट कर रहे हैं. आपके खिलाफ शिकायत मिली है. आपको गिरफ्तार करने पुलिस की टीम आ रही है. थोड़ी देर बाद आपके WhatsApp या फेसबुक मैसेंजर पर एक वीडियो भेजा जाता है. वीडियो में वीडियो चैटिंग करते हुए दिखते हैं. 

वीडियो भेजने वाला टूटी-फूटी अंग्रेजी में कहता है, 'वीडियो डिलीट ऑर नॉट?' फिर आपको फोन किया जाता है कि अगर आपने पैसे नहीं दिए तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाएगा. ऑनलाइन ठगों के जाल में फंसा आदमी घबरा जाता है. लोक-लाज के डर से मजबूरी में आदमी रोने-गिड़गिड़ाने लगता है. वह वीडियो डिलीट करने के लिए कहता है कि लेकिन ठग उससे मोटी रकम वसूलना चाहते हैं. 50,000 रुपये से शुरू हुई डिमांड कब लाखों में बदल जाती है पता नहीं चलता. फिर आदमी फंसता चलता जा रहा है.

कैसे बनाया जाता है फर्जी सेक्स टेप?

मॉर्फ्ड वीडियोज से आपको बदनाम किया जा सकता है लेकिन कोई भी समझदार इंसान यह आसानी से समझ लेगा कि यह एक मॉर्फ्ड वीडियो है. एडिटेड है. अक्सर ऐसे वीडियो कॉल करने वाला गैंग, प्री रिकॉर्डेड न्यूड या सेक्स टीजिंग वीडियो आपकी तस्वीर के साथ रिकॉर्ड कर लेते है. दरअसल जब किसी शख्स को वीडियो कॉल किया जाता है तो शख्स का चेहरा और प्री रिकॉर्डेड वीडियो एक ही स्क्रीन पर नजर आता है. चैटिंग का यह वीडियो बेहद सलीके से किसी  सॉफ्टवेयर के जरिए रिकॉर्ड कर लिया जाता है. फिर शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का गेम, जिसमें आदमी लगातार फंसता चला जाता है.

एक दो नहीं, हज़ारों लोग हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं के शिकार हुए हैं. लोग अनजाने में ही ऐसे हनीट्रैप का शिकार होते हैं, फिर उनसे भारी-भरकम रकम की मांग की जाती है. कहा जाता है कि वन टाइम पेमेंट कीजिए, फिर हम वीडियो डिलीट कर देंगे. भोले-भाले लोग सेक्स स्कैंडल में न फंसने के लिए रकम चुका देते हैं. 

एक बार रकम चुकाने के बाद बार-बार उनसे पैसों की डिमांड की जाती है. कुछ लोग लाखों गंवाने के बाद पुलिस की शरण में जाते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. कई लोग, इज्जत बचाने के लिए खुदकुशी तक कर चुके हैं. कुछ केसेज पुलिस ने सॉल्व भी किए हैं लेकिन तब, जब आप सही वक्त पर पुलिस की मदद लेंगे.
 

हाल के दिनों में बढ़ी हैं ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग की घटनाएं.

फंसने के बाद क्या करना है सबसे जरूरी?

जैसे ही इस तरह के जाल में फंसे, तत्काल पुलिस को सूचना दें. पुलिस की साइबर क्राइम सेल के गठन का मकसद ही यही है कि आपके साथ होने वाले हर ऑनलाइन फ्रॉड पर क्विक एक्शन ले. पुलिस पर भरोसा करें. पुलिस आपसे नंबर्स की डिटेल्स लेगी. फेसबुक आईडी या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सारी डिटेल्स आपसे मांगेगी. आईपी एड्रेस ट्रेस करेगी, फोन नंबर का लोकेशन खंगालेगी.

पुलिस के पास ऐसे मामलों को डील करने के लिए कई टूल हैं. आपकी सिर्फ एक पहल, से कई लोगों की जिंदगी और पैसे दोनों बचेंगे. किसी भी स्थिति में ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हों तो पुलिस के पास जाएं. इस दौरान आप फोन पुलिस के पास जाने से पहले और मामला सुलझने तक आप जालसाजों के संपर्क में बने रह सकते हैं. उनसे बैंक खाता मांगे, यूपीआई का पता लें, फोन नंबर लें, हर अपडेट लेकिन पुलिस को बताएं. पुलिस को दी गई हर इन्फॉर्मेशन आपकी मदद ही करेगी. कोर्ट ऐसे मामलों को बेहद सख्ती से डील करता है.

आप नहीं, वीडियो बनाने वाला है गुनाहगार!

किसी वीडियो में सिर्फ आपका चेहरा आ जाने से आप दोषी नहीं हो जाते हैं. एडिटेड वीडियो बनाने वाला शख्स खुद भारतीय दंड सहिंता (IPC) और IT एक्ट की गई धाराओं के तहत गुनाहगार हो जाता है. आईपीसी की धारा 292, 293 और 294 अश्लीलता से संबंधित धाराएं हैं. धारा 292 के अंतर्गत किसी भी तरह की अश्लील सामग्री के प्रकाशन संबंधित प्रावधान हैं. इसके तहत आपराधी को 2 साल की सजा और फाइन दोनों से गुजरना पड़ सकता है. दूसरी बार यही अपराध दोहराने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है और आर्थिक दंड भी दिया जा सकता है. वहीं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक तौर पर प्रकाशित करने पर दंडित किया जाता है. यंग पर्सन (हार्मफुल पब्लिकेशन) एक्ट 1956 और अन्य कानूनों के तहत भी आरोपी को कोर्ट में घसीटा जा सकता है.

आप वीडियो बनाने की पूरी प्रक्रिया में पीड़ित हैं. आपने वीडियो नहीं बनाया है, वीडियो उस गैंग ने बनाया है कि जो आपको ब्लैकमेल कर रहा है, जिसके जाल में आप बुरी तरह फंसे हैं. ऐसे में कानूनन न आप दोषी हैं, न ही आप पर कोई एक्शन लिया जा सकता है. आपको ब्लैकमेल करने वाले आईपीसी और अन्य संबंधित कानूनों की कई धाराओं के तहत सजा भुगतेंगे.

हाल के दिनों में कई लोग हो चुके हैं शिकार

ऑनलाइन सेक्स ब्लैकमेलिंग रैकेट के कई लोग शिकार हो चुके हैं. शिकार होने वाले लोगों में कई हाई प्रोफेशनल लोग भी शामिल हैं. सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लेकर सरकारी कर्मचारी और डॉक्टर्स तक ऐसे गैंग की जाल में फंस चुके हैं. नाम न बताने की एक शर्त पर एक आईटी प्रोफेशनल ने कहा कि उसे भी हाल में ही ऐसे ममाले का शिकार होना पड़ा. उसकी एडिटेड कॉलिंग वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी गई. उसने पैसे देने की सोची लेकिन तभी एक परिचित ने उसे बचने का सही रास्ता सुझाया और बड़ी ठगी से बच गया.

ऐसा ही मामला एक सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के साथ भी हुआ. उन्हें भी ऐसी ही कॉलिंग की गई. उन्होंने अपना कैमरा ऑफ रखा और पूरी प्रक्रिया को केस स्टडी की तरह देखने लगे. साइबर क्राइम से जुड़े मामलों को कवर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के एक अधिवक्ता विशाल अरुण ने कहा कि ऐसे मामलों में लोगों का डर, ब्लैकमेलिंग की बड़ी वजह बनता है. जबकि खुद ऐसे वीडियोज आपको भेजने वाला शख्स अपनी हरकतों के लिए जेल जा सकता है. हाल के दिनों में लगातार ऐसे मामले बढ़ रहे हैं, जब किसी न किसी को ऐसे ऑनलाइन ब्लैकमेल किया जा रहा हो. मासूम लोग फंसते हैं, चालाक लोग पुलिस के पास जाते हैं.

वीडियो वायरल होने से नहीं जाएगी इज्जत!

कानूनों से इतर, एक बात जरूर आपको समझनी चाहिए कि आपकी जिंदगी से कीमती, आपकी बदनामी भी नहीं है. अगर ऐसे वीडियोज से आपको बदनामी से डर लगता है तो पुलिस का रुख कीजिए. दोषियों के खिलाफ एक्शन लीजिए लेकिन पैसे न पहुंचाए. खुदकुशी भी आपको बदनामी से बचाती नहीं है और बदनाम करती है. अगर वीडियो वायरल भी हो जाए तो भी डरें नहीं. आपने कुछ ऐसा नहीं किया है कि जिससे समाज आपको दोषी समझेगा. पुलिस आपकी मदद के लिए है. तत्काल पुलिस की मदद लें और खुद को भी सुरक्षित करें, समाज को भी.
 

Read more!

RECOMMENDED