दिल्ली की रहने वाली नेहा भारती ने कम उम्र में ही हिम्मत और जिम्मेदारी की ऐसी कहानी लिखी है, जो हर किसी को प्रेरित करती है. 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद नेहा ने अपने परिवार का सहारा बनने के लिए एक बड़ा फैसला लिया. अचानक मां की मौत के बाद, नेहा ने हालातों से हार मानने के बजाय पिता भी बीमार रहने लगे.
पिता ऑटो ड्राइवर थे. घर में पैसे की तंगी हुई, नेहा आगे आई और स्टीयरिंग थाम अपने घर की गाड़ी आगे बढ़ाने लगी. यूं ही सीखी ड्राइविंग, सर्टिफाइड ट्रेनर हैं नेहा, जहां आमतौर पर इस क्षेत्र में महिला ड्राइवर कम देखने को मिलती हैं, वहीं नेहा ने इस चुनौती को स्वीकार किया. करीब 30 लाख रुपए की लग्ज़री कार चलाते हुए, वो दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर यात्रियों की सुरक्षा और आराम का पूरा ध्यान रखती हैं. नेहा ने बक़ायदा ड्राइविंग की ट्रेनिंग ली है. और वो एक सर्टिफाइड ड्राइवर हैं.
लोग हैं जेंडर बायस्ड
नेहा बताती हैं कि जब उन्होंने अपनी इच्छा घरवालों को बताई तो सबने मना किया. सबने कहा कि लड़की हो कोई और काम कर लो. वो कोई और काम कर भी लेती लेकिन किसी और काम में इतने पैसे नहीं मिल रहे थे. कोई 10-12 हज़ार से ज़्यादा देने को तैयार नहीं था. नेहा बताती हैं कि उसने सबसे पहले एक केमिस्ट के यहां काम किया जो उन्हें सिर्फ 4 हज़ार रुपए देता था. नेहा बताती हैं कि लोग अब भी बहुत जेंडर बायस्ड हैं. सड़क पर गाड़ी चलाते समय लोग उन्हे ऐसे लुक देते हैं जैसे मुझे गाड़ी चलानी नहीं आती. नेहा बताती हैं कि लोग अपनी गलती पर भी उन्हें घूरते हैं. मोहल्ले में भी लोग मजाक में बोलते हैं कि हट जाओ हैवी ड्राइवर आ रहा है.
महिला ड्राइवर देख पैंसेजर नहीं बैठा
नेहा बताती हैं कि वैसे तो अधिकतर पैसेंजर जब देखते हैं कि उनकी ड्राइवर फ़ीमेल हैं तो वो बहुत प्रोत्साहित करते हैं. कई लोग तारीफ़ करते हैं कि तुम्हें देखकर ख़ुशी हुई. लेकिन कुछ पैसेंजर बहुत जजमेंटल होते हैं. एक बार एक महिला पैसेंजर ने उनके साथ यात्रा करने से इंकार कर दिया. वो महिला बोली के लेडीज़ ड्राइवर हैं ये गाड़ी बहुत स्लो चलाएगी और इसे रास्ते भी नहीं पता होंगे.
मां से मिला आत्मविश्वास का आशीर्वाद
नेहा बताती हैं कि चार बहनों और एक छोटे भाई के बीच उनकी मां हमेशा उन्हें एक बेटे की तरह ही मानती थी. बाहर के सारे काम मां मुझसे ही करवाती थीं. मेरे अंदर जो आत्मविश्वास है वो मां का ही दिया हुआ है. नेहा का सपना है कि वो अपने छोटे भाई को डॉक्टर बनाए. नेहा पिता के लिए एक घर भी बनाना चाहती हैं. लेकिन जब हमने नेहा से पूछा कि आपका अपने लिए क्या सपना है तो वो काफ़ी देर तक सोचने के बाद भी कुछ बता नहीं पाईं.
जहां मिलेगी इज़्ज़त वहीं करूंगी शादी
नेहा बताती हैं कि वो ऐसे घर में ही शादी करेंगी जहां उनकी और उनके काम की इज़्ज़त हो. नेहा की ये कहानी न सिर्फ हिम्मत और आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि ये भी दिखाती है कि मजबूत इरादों से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है.