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सूरत में जैन समाज का त्याग: 2 घंटे में करोड़ों दान, महिलाओं ने उतारे गहने, ‘ऊर्जा भूमि’ के लिए उमड़ा जनसैलाब

मात्र दो घंटे के भीतर जैन समाज ने करोड़ों रुपये का दान देकर अपनी एकता और उदारता की नई मिसाल पेश की है. इस कार्यक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें महिलाएं अपने सोने के गहने दान करते हुए नजर आ रही है.

Jain community donated crores of rupees
gnttv.com
  • सूरत ,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST

सूरत के जैन समाज की अटूट श्रद्धा और उदारता का एक प्रेरणादायक उदाहरण का वीडियो सामने आया है. सूरत में जैन समाज के 'ऊर्जा भूमि' के निर्माण के लिए जिस तरह से लोगों ने अपना सर्वस्व अर्पण किया, वह भक्ति की पराकाष्ठा है. अपनी दानवीरता और व्यापारिक सूझबूझ के लिए विश्व प्रसिद्ध 'डायमंड सिटी' सूरत हाल ही में एक ऐसी आध्यात्मिक घटना का साक्षी बना, जिसने इतिहास रच दिया है.

सूरत के ऐतिहासिक क्षेत्र गोपीपुरा में आयोजित जैन धर्म के एक भव्य कार्यक्रम में श्रद्धा और समर्पण का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि हर कोई दंग रह गया. मात्र दो घंटे के भीतर जैन समाज ने करोड़ों रुपये का दान देकर अपनी एकता और उदारता की नई मिसाल पेश की है. इस कार्यक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें महिलाएं अपने सोने के गहने दान करते हुए नजर आ रही है.

कीमती आभूषण उतारकर दान
इस कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक पहलू ही महिलाओं का योगदान रहा. जैसे ही 'ऊर्जा भूमि' के निर्माण के लिए दान की अपील की गई, हजारों की संख्या में श्राविकाएं यानि कि महिला भक्त प्रसन्नतापूर्वक आगे आईं. उन्होंने बिना किसी झिझक के अपने शरीर से कीमती आभूषण उतारकर दान पात्र में डालने शुरू कर दिए थे. दान किए गए आभूषणों में मुख्य रूप से सोने की चेन, स्वर्ण कंगन और चूड़ियां, कान की बालियां और सोने की अंगूठियां शामिल थे.

15000 श्रावक- श्राविकाएं उपस्थिति रहे
अपनी प्रिय ज्वेलरी को संस्कृति और धर्म के संरक्षण के लिए सहर्ष त्याग देना, उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है. सूरत का गोपीपुरा क्षेत्र जैन धर्म के लिए अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक महत्व रखता है. इस क्षेत्र की प्राचीन भव्यता को पुनर्जीवित करने और यहां ऊर्जा भूमि के निर्माण के लिए जैन समाज ने इस विशेष सभा का आयोजन किया था. इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा केंद्र स्थापित करना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कारों, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य स्रोत बने. बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में जैन समाज के करीबन पंद्रह हजार श्रावक-श्राविकाएं उपस्थिति रहे थे. दान की अवधि मात्र 2 घंटे रखी गई थी और दान का स्वरूप सोना, नकद और वित्तीय संकल्प रखा गया था।दान से मुख्य लक्ष्य सूरत के गोपीपुरा इलाके में ऊर्जा भूमि का निर्माण एवं संस्कृति का संरक्षण था.

भक्तिमय भजनों से गूंज उठा वातावरण
इस कार्यक्रम में सूरत और आसपास के क्षेत्रों से जुटे श्रद्धालुओं की वजह से पूरा वातावरण 'जय जिनेंद्र' के उद्घोष और भक्तिमय भजनों से गूंज उठा था. जैन मुनियों के आशीर्वाद और धर्म के प्रति अटूट विश्वास के कारण लोगों ने मुक्त हस्त से दान दिया. यह केवल धन का दान नहीं है, बल्कि अपनी विरासत और मूल्यों को जीवित रखने की एक सामूहिक प्रतिबद्धता है. सूरत के गोपीपुरा में बनने वाली यह 'ऊर्जा भूमि' भविष्य में आध्यात्मिक ऊर्जा और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार का एक बड़ा केंद्र सिद्ध होगी ऐसा माना जा रहा है.

रिपोर्टर: संजय सिंह राठौड़

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