Uttarakhand plastic free: उत्तराखंड को प्लास्टिक मुक्त बनाने में महिलाएं दे रही विशेष योगदान, बेकरी से लेकर इको-फ्रेंडली बकेट बेच कर बन रही आत्मनिर्भर

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. 6280 से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर खेती, बागवानी, बेकरी और हस्तशिल्प से आय बढ़ा रही हैं. वहीं प्लास्टिक मुक्त हिमालय अभियान के तहत महिलाएं मक्के के छिलकों से पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाकर पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दे रही हैं.

Plastic free Himalaya campaign
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

उत्तराखंड में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) अहम भूमिका निभा रहा है. ग्राम्य विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से चल रहे इस मिशन के जरिए हजारों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है, जहां महिलाएं खेती, हस्तशिल्प, प्रसंस्करण और बेकरी जैसे क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रही हैं.

6 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं मिशन से
विकास खंड में अब तक 1203 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है. इसके अलावा 140 ग्राम संगठन और न्याय पंचायत स्तर पर 9 सहकारिताएं भी बनाई गई हैं. मिशन से कुल 6280 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और उद्यम विकास से संबंधित अवसर दिए जा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है.

खेती और बागवानी से बढ़ रही आय
मिशन के तहत करीब 700 समूह कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. महिलाएं बागवानी, पॉलीहाउस के जरिए सब्जी उत्पादन और स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन का काम कर रही हैं. इन गतिविधियों की बदौलत कई महिलाओं की औसत मासिक आय 10 से 12 हजार रुपए तक पहुंच गई है. कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन और बाजार से जुड़ाव ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए रास्ते खोले हैं.

प्लास्टिक मुक्त हिमालय अभियान में महिलाओं की भागीदारी
चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए महिला समूहों को 'प्लास्टिक मुक्त हिमालय' अभियान से भी जोड़ा गया है. महिलाएं मक्के के छिलकों से पर्यावरण अनुकूल बकेट और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों का इस्तेमाल तीर्थयात्री प्रसाद और अन्य सामान रखने के लिए कर रहे हैं. इसके साथ ही महिला समूह थालियों पर कलात्मक डिजाइन और यमुना जी की प्रतिमा की आकृतियां भी बना रहे हैं. इससे स्थानीय कला और संस्कृति को नया बाजार मिल रहा है.

ऑनलाइन बाजार तक पहुंचने की तैयारी
समूह से जुड़ी पूनम बधानी बताती हैं कि पहले आय के सीमित साधन थे, लेकिन आज मिशन की मदद से उनकी कमाई बढ़ी है. अब महिलाएं अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बाजार तक पहुंचाने की तैयारी भी कर रही हैं. उनका मानना है कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है.

बेकरी उद्योग में भी बना रहीं पहचान
विकास खंड नौगांव में महिला समूह बेकरी उद्योग में भी बेहतर काम कर रहे हैं. महिलाएं मंडुवा बिस्किट, मल्टीग्रेन आटे के क्रीम रोल, फेन और अन्य बेकरी उत्पाद तैयार कर रही हैं. समूह से जुड़ी कृष्णा देवी कहती हैं कि अब वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अपने फैसले खुद लेने में भी सक्षम हो गई हैं.

महिलाओं को मिल रही आर्थिक मजबूती
मिशन से जुड़े प्रबंधक रवींद्र नौटियाल के अनुसार, पूरे विकास खंड में 1203 समूह सक्रिय हैं. महिलाओं को प्रशिक्षण, उद्यम विकास और विपणन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं.

आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ते कदम
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं के लिए बदलाव की मजबूत मिसाल बनकर उभरा है. कृषि, हस्तशिल्प, पर्यावरण संरक्षण और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में काम कर महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि "आत्मनिर्भर महिला, समृद्ध गांव" की सोच को भी जमीन पर उतार रही हैं.

(रिपोर्ट- ओंकार बहुगुणा)

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