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'हल्क' वाला खिलौना निगल गया डेढ़ साल का बच्चा, 45 मिनट तक डॉक्टरों ने लड़ी लड़ाई, फिर मिली सफलता

गुजरात के अहमदाबाद में एक बच्चा 'हल्क' वाला प्लास्टिक का खिलौना निगल गया. घरवाले फौरन उसे अस्पताल ले गए. डॉक्टरों ने ऑपरेशन थिएटर में 45 मिनट तक कोशिश की. इसके बाद बच्चे के पेट से खिलौना निकाला जा सका. फिलहाल बच्चा पूरी तरह से सेफ है.

Ahmedabad News
अतुल तिवारी
  • अहमदाबाद,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

गुजरात में अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. वंश नाम के डेढ़ साल के बच्चे ने खेलते-खेलते 'हल्क' वाला प्लास्टिक का खिलौना निगल लिया. जिसके बाद परिवार बच्चे को लेकर तुरंत सिविल हॉस्पिटल लेकर पहुंचा, जहां एक्सरे में खिलौना पेट में दिखा. डॉक्टरों ने सर्जरी करके प्लास्टिक के खिलौने को निकाला.

बच्चे ने निगल लिया खिलौना-
ये वाक्या 18 जनवरी का है. उस दिन बच्चा घर में खेल रहा था. परिवार ने अचानक बच्चे के चेहरे पर परेशानी देखी. कुछ समय बाद बच्चे को उल्टी होने लगी. जिसके बाद बच्चे की मां भाविकाबेन को शक हुआ. जब मां ने बच्चे की परेशानी देखी तो उसने पाया कि बच्चे का सभी खिलौने चेक करने पर पता चला की, एक खिलौना गायब था. बच्चे से पूछने पर उसने खिलौना निगलने की बात कही. फिर क्या था, परिवार वाले तुरंत बच्चे को लेकर सिविल हॉस्पिटल पहुंचे. जहां X-ray में पेट के अंदर पूरा खिलौना दिखा, जिसे देखकर डॉक्टर भी दंग रह गए.

45 मिनट तक चला ऑपरेशन-
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने मुश्किल सर्जरी के बारे में बताया कि बच्चे के पेट में फंसा खिलौना कोई टुकड़ा नहीं था, बल्कि हाथ, पैर और सिर वाली एक पूरी साइज़ की चीज थी. खाने की नली और पेट के बीच एक नेचुरल वॉल्व होता है. सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े खिलौने को इस वॉल्व से होकर निकलना था. जब हमने एंडोस्कोप जैसे नाजुक टूल से उसे पकड़ने की कोशिश की, तो पेट में हवा होने की वजह से खिलौना फिसलता रहा. अगर हमने उसे हाथ या पैर से पकड़कर खींचा होता, तो उसके वॉल्व में फंसने और वॉल्व को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचने की बहुत बड़ी संभावना थी. हमने सब्र रखा और 45 मिनट तक चले ऑपरेशन के दौरान खिलौने के सिर को पकड़कर सावधानी से वॉल्व पार करके उसे बाहर निकालने में कामयाब रहे. अगर यह खिलौना आंत में चला जाता, तो आंत फटने का खतरा होता और ऑपरेशन करना पड़ता है.

डॉक्टर ने की छोटे बच्चों के पैरेंट्स से अपील-
यह मुश्किल सर्जरी की गई उस समय सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट में 'इंटरनेशनल ब्लैडर एक्सट्रॉफी वर्कशॉप' चल रहा था. लेकिन इमरजेंसी देखकर सुपरिंटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने खुद डॉ. स्वेता और एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की टीम के साथ मिलकर 19 जनवरी को सफल ऑपरेशन किया.

ऑपरेशन के बाद डेढ़ साल का वंश अब पूरी तरह से स्वस्थ है. डॉक्टर राकेश जोशी ने छोटे बच्चों के माता- पिता से अपील की और कहा कि बच्चों को कभी भी इतने छोटे खिलौनों से अकेले नहीं खेलने देना चाहिए और जब बच्चा खेल रहा हो तो उस पर लगातार ध्यान देना चाहिए.

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