शुगर की जांच के लिए ब्लड टेस्ट भूल जाइए, वैज्ञानिकों ने तैयार कर डाला ऐसा स्कैन जो आंखों से लगाएगा डायबिटीज का पता

डायबिटीज की पहचान अब बिना खून की जांच के भी संभव हो सकती है. भारतीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मिलकर एक नई तकनीक विकसित की है, जिसमें आंख के पिछले हिस्से यानी रेटिना की हाई-रिजॉल्यूशन फोटो लेकर यह पता लगाया जा सकता है.

Eye Scan
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST
  • बिना ब्लड टेस्ट डायबिटीज की पहचान
  • प्री-डायबिटीज भी पकड़ लेता है सिस्टम

भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि इनमें से बड़ी संख्या को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें डायबिटीज है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो बिना खून की जांच के डायबिटीज का पता लगा सकती है.

AI की मदद से चलेगा पता
इस तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से रेटिना की हाई-रिजॉल्यूशन फोटो ली जाती है और उसी से ब्लड शुगर के संकेत पहचाने जाते हैं. यह रिसर्च जर्नल Diabetes Technology and Therapeutics में प्रकाशित हुई है.

सूक्ष्म बदलावों को पहचान सकता है
अध्ययन के मुताबिक, AI आंखों की ब्लड वैसल्स में मौजूद बेहद सूक्ष्म बदलावों को पहचान सकता है, जो आमतौर पर इंसानी आंखों से दिखाई नहीं देते. यही बदलाव यह तय करने में मदद करते हैं कि व्यक्ति को डायबिटीज है या नहीं.

इस अध्ययन में शामिल चेन्नई के मशहूर डायबिटोलॉजिस्ट और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. वी. मोहन ने कहा कि भारत में डायबिटीज की समय पर पहचान बहुत बड़ी जरूरत है. अगर रेटिना की साधारण फोटो और AI टूल्स की मदद से शुरुआती स्तर पर डायबिटीज का पता चल सके, तो भविष्य में रियल-टाइम स्क्रीनिंग संभव हो सकती है.

अमेरिका की एमोरी यूनिवर्सिटी से जुड़ी डॉ. सुधेष्णा सिल कर ने बताया कि AI को खास तौर पर आंख की नसों और धमनियों के आकार, पैटर्न और घुमाव को पहचानने के लिए ट्रेन किया गया. इसके लिए डायबिटीज वाले और बिना डायबिटीज वाले लोगों की रेटिनल तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया.

रिसर्च टीम में कर्नाटक की येनेपोया (डीम्ड टू बी) यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक भी शामिल थे. टीम ने 139 लोगों की 273 रेटिनल इमेज का विश्लेषण किया. इसमें धमनियों और नसों से जुड़े 226 अलग-अलग मापदंडों को मशीन विजन तकनीक से निकाला गया.

सिस्टम प्री-डायबिटीज को भी पहचानने में भी सक्षम
टेस्ट ग्रुप में इस AI तकनीक ने 95 प्रतिशत संवेदनशीलता (Sensitivity) के साथ डायबिटीज की सही पहचान की. खास बात यह रही कि यह सिस्टम प्री-डायबिटीज को भी पहचानने में सक्षम रहा. प्री-डायबिटीज वह अवस्था होती है, जहां सही खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके डायबिटीज को रोका जा सकता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तरीका पूरी तरह नॉन-इनवेसिव है. इसमें न तो मरीज को भूखा रहना पड़ता है, न सुई चुभोकर खून देना पड़ता है और न ही महंगे लैब टेस्ट की जरूरत होती है. सिर्फ आंख के पीछे की एक फोटो काफी है.

 

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