मंकीपॉक्स के लक्षणों और स्किन के घावों के ट्रीटमेंट में प्रभावी है एंटीवायरल Tecovirimat... स्टडी में हुआ खुलासा, जानिए TPOXX के बारे में     

एंटीवायरल टेकोविरिमैट मंकीपॉक्स के लक्षणों और स्किन के घावों के ट्रीटमेंट में प्रभावी पाई गई है. 25 रोगियों पर ये स्टडी की गई थी. इसमें ये सभी लोग 27 से 76 साल तक की उम्र के थे.

Monkeypox
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST
  • 25 रोगियों पर की गई स्टडी
  • टेकोविरिमैट है प्रभावी

कोरोना के बाद अब मंकीपॉक्स वायरस को  दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं. ऐसे में एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि एंटीवायरल टेकोविरिमैट (Tecovirimat) मंकीपॉक्स के लक्षणों और त्वचा के घावों के उपचार के लिए सुरक्षित और प्रभावी है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, जामा जर्नल में इस स्टडी को पब्लिश किया गया है. इस स्टडी मंकीपॉक्स के 25 रोगियों पर की गई थी. 

TPOXX क्या है?

Tecovirimat (TPOXX) चेचक (Smallpox) या जिसे (हम छोटी माता भी कहते हैं) के उपचार के लिए एक एंटीवायरल दवा है. यह शरीर में फैले हुए वायरल को कम करता है और उससे जो प्रोटीन निकलता है उसे सीमित कर देता है. बता दें, हाल ही में, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने फिजिशियन को मंकीपॉक्स जैसे ऑर्थोपॉक्सवायरस इंफेक्शन वाले वयस्कों और बच्चों के इलाज के लिए टेकोविरिमैट देने की अनुमति दी है. 

25 रोगियों पर की गई स्टडी

इस स्टडी के प्रमुख लेखक एंजेल देसाई कहते हैं, “मंकीपॉक्स इंफेक्शन के लिए टेकोविरिमैट के उपयोग पर हमारे पास बहुत सीमित क्लीनिकल डेटा है. इस बीमारी के बारे में और टेकोविरिमैट और दूसरे एंटीवायरल इसे कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इसके बारे में जानने के लिए बहुत कुछ है."

बता दिए, इन 25 रोगियों पर 3 जून से 13 अगस्त, 2022 के बीच यूसी डेविस मेडिकल सेंटर द्वारा स्टडी की गई है. 

कैसे की गई ये स्टडी?

दरअसल, रोगियों के शरीर के कई हिस्सों में या चेहरे या जननांग क्षेत्र जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहां स्किन पर घाव होता है उन्हें ओरल टेकोविरिमैट ट्रीटमेंट दिया गया. इसे हर 8 या 12 घंटे में दिया गया. और रोगियों ने इसे हाई फैट मील के 30 मिनट के भीतर लिया. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ताओं ने ट्रीटमेंट के लिए पहले व्यक्तिगत मूल्यांकन किया और उनका क्लीनिकल डेटा की जांच की. ये 7 वें दिन और 21 वें दिन पर किया गया. 

इस स्टडी में सभी पुरुष थे, जिनकी उम्र 27 से 76 साल के बीच थी. इनमें से 9 मरीजों को एचआईवी था. केवल एक ही रोगी के पास चेचक का टीका लिया था. उसने ये वैक्सीन 25 साल पहली ली थी.

 


 

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