एंटी-एजिंग के लिए मशहूर अरबपति बिजनेसमैन ब्रायन जॉनसन को हुई दुर्लभ Autoimmune Gastritis बीमारी, जानिए क्या है यह

ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस एक पुरानी (क्रॉनिक) बीमारी है. इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने के बजाय पेट की स्वस्थ कोशिकाओं को ही नुकसान पहुंचाने लगती है.

Tech entrepreneur Bryan Johnson
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST
  • क्या है ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस?
  • बीमारी का पता कैसे चलता है?

लंबी उम्र और एंटी-एजिंग तकनीकों के लिए दुनिया भर में मशहूर अरबपति बिजनेसमैन ब्रायन जॉनसन ने खुलासा किया है कि वह ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस (Autoimmune Gastritis-AIG) नाम की एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं. इस स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से पेट की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगता है, जिससे पेट की अंदरूनी परत और एसिड बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं.

ब्रायन जॉनसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'मुझे ऑटोइम्यून बीमारी है. मेरा पेट खुद को खा रहा है.' उन्होंने बताया कि शुरुआत में कई सामान्य जांचों के बावजूद बीमारी की सही वजह सामने नहीं आई. बाद में विशेष ब्लड टेस्ट और पेट की बायोप्सी के जरिए ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस की पुष्टि हुई. यह बीमारी अक्सर लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रहती है. इलाज में देरी होने पर शरीर में आयरन और विटामिन B12 की कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया और आगे चलकर पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.

 

क्या है ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस?
ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस एक पुरानी (क्रॉनिक) बीमारी है. इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने के बजाय पेट की स्वस्थ कोशिकाओं को ही नुकसान पहुंचाने लगती है.

इससे पेट की पैराइटल सेल्स प्रभावित होती हैं. ये कोशिकाएं पेट में एसिड बनाने का काम करती हैं, जो भोजन को पचाने और शरीर में आयरन व विटामिन B12 के अवशोषण के लिए जरूरी होता है. जब ये कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, तो पेट में एसिड कम बनने लगता है और शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने लगती है.

क्यों होती है यह बीमारी?
ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस की सटीक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें आनुवंशिक कारण और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी बड़ी भूमिका निभाते हैं.

यह बीमारी उन लोगों में अधिक देखी जाती है जिन्हें पहले से कोई दूसरी ऑटोइम्यून बीमारी, जैसे थायरॉयड रोग, टाइप-1 डायबिटीज या विटिलिगो हो.

इसके लक्षण क्या हैं?

  • हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होना

  • चक्कर आना

  • बार-बार सिरदर्द होना

  • त्वचा का पीला पड़ना

  • हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन

  • संतुलन बनाने में परेशानी

  • याददाश्त या ध्यान लगाने में दिक्कत

  • जी मिचलाना और उल्टी

  • भूख कम लगना

बिना वजह वजन घटना

बीमारी का पता कैसे चलता है?

  • इस बीमारी की पहचान करना आसान नहीं होता क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण या तो नहीं होते या सामान्य गैस की समस्या जैसे लगते हैं.

  • विटामिन B12 और आयरन की जांच

  • ब्लड टेस्ट

  • ऑटोइम्यून एंटीबॉडी टेस्ट

  • एंडोस्कोपी

  • पेट की बायोप्सी


क्या इसका इलाज संभव है?
ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई दवा फिलहाल उपलब्ध नहीं है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर विटामिन B12 इंजेक्शन या सप्लीमेंट, आयरन और फोलिक एसिड की दवाएं देते हैं. साथ ही मरीज की नियमित निगरानी भी की जाती है ताकि किसी गंभीर जटिलता का समय रहते पता चल सके.

क्या इससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस रहने पर पेट की कोशिकाओं में बदलाव होने लगते हैं. ऐसे मरीजों में सामान्य लोगों की तुलना में गैस्ट्रिक (पेट) कैंसर और कुछ अन्य प्रकार के पेट के ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर मरीज को कैंसर होगा. लेकिन समय-समय पर एंडोस्कोपी और डॉक्टर की निगरानी से किसी भी बदलाव का जल्दी पता लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है.

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर लंबे समय से लगातार थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, बार-बार चक्कर आना, बिना वजह वजन घटना या विटामिन B12 और आयरन की कमी बार-बार सामने आ रही है, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर होता है.

ये भी पढ़ें:

 

Read more!

RECOMMENDED