Advertisement

Feel Good: 5 मिनट तक धड़कन रुकने के बाद फिर से जिंदा हुआ 'मरा हुआ' दिल, 3 महीने के बच्चे को मिली नई जिंदगी

सर्जनों ने एक खास मशीन तैयार की जिसमें ऑक्सीजन देने वाला सिस्टम, सेंट्रीफ्यूगल पंप और एक ब्लड कलेक्शन टैंक शामिल था. इस मशीन की मदद से दिल में फिर से ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन सप्लाई की गई, जिससे वह दोबारा धड़कने लगा.

dead heart
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 22 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST
  • बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी
  • क्या ये तकनीक बच्चों के लिए ज्यादा कारगर है?

ड्यूक यूनिवर्सिटी के सर्जनों ने एक मर चुके दिल को दोबारा जिंदा कर दिया. अब इस दिल को एक 3 महीने के बच्चे में ट्रांसप्लांट कर दिया गया है. बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और 6 महीने बाद तक कोई भी ऑर्गन रिजेक्शन नहीं दिखा है.

दिल को फिर से कैसे धड़काया गया?
सर्जनों ने एक खास मशीन तैयार की जिसमें ऑक्सीजन देने वाला सिस्टम, सेंट्रीफ्यूगल पंप और एक ब्लड कलेक्शन टैंक शामिल था. इस मशीन की मदद से दिल में फिर से ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन सप्लाई की गई, जिससे वह दोबारा धड़कने लगा.

क्या पहले से उपलब्ध मशीनें ऐसे मामलों में काम नहीं करतीं?
मौजूदा मशीनें वयस्क अंगों के लिए डिजाइन की गई हैं और इतनी बड़ी होती हैं कि नवजात या शिशु दिल के लिए उपयुक्त नहीं होतीं. इसलिए ड्यूक टीम ने एक कस्टम मशीन बनाई.

क्या है ‘ऑन-टेबल रीएनीमेशन’ तकनीक?
जब किसी डोनर का दिल घड़कना बंद हो जाता है तो सामान्य तौर पर वह ट्रांसप्लांट के लिए अनुपयोगी माना जाता है. लेकिन ‘ऑन-टेबल रीएनीमेशन’ एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें बंद पड़े दिल को  दोबारा चालू किया जाता है. इसे 'ऑन-टेबल रीएनीमेशन' कहा जाता है यानी डोनर शरीर से दिल निकालकर ऑपरेशन टेबल पर ही दोबारा एक्टिव करना. इसे ऑपरेशन को शरीर के बाहर किया जाता है.

वेंडरबिल्ट का तरीका क्यों खास है?
इस तकनीक में हार्ट को क्लैंप करके सिर्फ उसी में फ्लश भेजा जाता है, जिससे ब्रेन तक ब्लड नहीं पहुंचता. अब तक तीन सफल ट्रांसप्लांट इसी तकनीक से किए जा चुके हैं.

छोटे बच्चों के दिल डोनेट नहीं होते
अमेरिका में हर साल लगभग 20% ऐसे नवजात बच्चे दिल के इंतजार में मर जाते हैं जिन्हें समय पर डोनर नहीं मिल पाता. यह तकनीक इसलिए भी खास है क्योंकि छोटे बच्चों के लिए दिल दान बहुत कम होते हैं और हर पांच में से एक बच्चा इलाज से पहले ही दम तोड़ देता है. अगर ये दोनों तकनीकें सफल रहती हैं तो बच्चों के लिए दिल ट्रांसप्लांट की उपलब्धता 30% तक बढ़ सकती है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement