सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के सीईओ अदार पूनावाला ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से मुलाकात करके मंकीपॉक्स वायरस के खिलाफ एक टीका विकसित करने के लिए एसआईआई में रिसर्च के बारे में चर्चा की.
पिछले हफ्ते, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने मंकीपॉक्स वायरस के खिलाफ एक वैक्सीन कैंडिडेट विकसित करने के लिए निजी प्लेयर्स से बोलियां आमंत्रित करते हुए एक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जारी किया था. इसके अलावा आईसीएमआर की एक लैब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने मंकीपॉक्स वायरस से पीड़ित मरीज के क्लीनिकल स्पेसिमेन आइसोलेट करने में भी सफल रहे. कोविड -19 के मामले में भी, एनआईवी-पुणे वायरस को अलग करने में सफल रहा था जिसे बाद में हैदराबाद स्थित एक फर्म भारत बायोटेक को ट्रांसफर कर दिया गया था. भारत बायोटेक ने ही कोवैक्सिन विकसित किया था, जो कोविड के खिलाफ टीकों में से एक था.
बढ़ रही है मामलों की संख्या
मंकीपॉक्स ने दुनिया भर में 23,000 से अधिक लोगों को प्रभावित किया है. इनमें से अधिकांश मामले यूरोप से सामने आए हैं. सूत्रों ने कहा कि भारत में अब तक मंकीपॉक्स के आठ मामलों की पुष्टि हो चुकी है और यह संख्या बढ़ने की संभावना है. एक सूत्र ने कहा,“मंकीपॉक्स से पॉजीटिव पाए गए व्यक्तियों के प्राथमिक संपर्कों से लिए गए 50 से अधिक नमूनों पर वर्तमान में परीक्षण चल रहा है. इनमें से कुछ सिम्टोमैटिक हैं. ”
चेचक का टीका करेगा मदद
चेचक के खिलाफ टीका मंकीपॉक्स को रोकने में मदद करने वाला माना जा रहा है. हालांकि, इसकी उपलब्धता दुनिया भर में कम है. एनआईवी के वैज्ञानिकों का कहना है कि संभावित संकट से निपटने के लिए स्वदेशी वैक्सीन का विकास आवश्यक है.मनुष्यों में मंकीपॉक्स की पहचान सबसे पहले 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हुई थी. लेकिन उसके बाद लगभग 50 वर्षों तक, अफ्रीकी क्षेत्रों के बाहर से वायरल बीमारी के कुछ मामले सामने आए, जहां यह स्थानिक है. अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और भारत सहित अन्य क्षेत्रों में बीमारी के अचानक फैलने से सभी हैरान हैं.