आजकल हर घर में बर्तन धोने के लिए साबुन या लिक्विड का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसको लेकर सवाल भी उठते रहते हैं कि केमिकल से बर्तन धोना सेहत के सेहत के लिए ठीक नहीं होता है. बर्तन धोने के लिए ग्रामीण भारत में सदियों से चूल्हे की राख का इस्तेमाल होता रहा है. लेकिन अब सवाल उठता है कि बर्तन धोने के लिए सबसे बेस्ट तरीका साबुन है या राख. चलिए ये जानने की कोशिश करते हैं.
राख से बर्तन धोना फायदेमंद क्यों?
चूल्हे की राख का इस्तेमाल भारतीय घरों में सदियों से होता आ रहा है. यह राख न केवल बर्तन को चमकाने में मदद करती है, बल्कि उसमें मौजूद बैक्टीरिया और जर्म को भी खत्म करती है. राख में पोटेशियम कार्बोनेट होता है, जो एक प्राकृतिक सफाई एजेंट है. यह बर्तन को बिना किसी हानिकारक केमिकल के साफ करता है. चूल्हे की राख न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है. यह एक प्राकृतिक उत्पाद है, जो किसी भी प्रकार के प्रदूषण को बढ़ावा नहीं देता. इसके उपयोग से केमिकल युक्त उत्पादों पर निर्भरता कम हो सकती है.
साबुन से बर्तन धोने से क्या होता है?
आजकल अधिकांश घरों में बर्तन धोने के लिए साबुन और लिक्विड का उपयोग किया जाता है. हालांकि इन उत्पादों में मौजूद केमिकल बर्तन पर एक पतली परत छोड़ देते हैं. यह परत भोजन के साथ हमारे पेट में पहुंचती है और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि चूल्हे की राख का उपयोग इन समस्याओं से बचने का एक प्रभावी तरीका है.
महंगी बिक रही है राख-
चूल्हे की राख देश-विदेश में भी बिक रही है. भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह करीब 200 रुपए में एक किलोग्राम मिल रही है. इसके साथ ही विदेशों में भी इसकी डिमांड है. इससे बर्तन धोने से सेहत के लिए फायदेमंद होता है. भले ही राख की डिमांड बढ़ रही है, लेकिन आम भारतीय घरों में इसका इस्तेमाल करीब-करीब खत्म हो गया है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. GNTTV.COM इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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