आजकल लगभग हर उम्र के लोगों में दिल का दौरा पड़ता देखा जा रहा है. हालांकि ज्यादातर लोग शुरू में जब उन्हें हार्ट अटैक आता है तो वे इससे बच जाते हैं, लेकिन बाद के कुछ साल में मृत्यु का जोखिम काफी बढ़ जाता है. बाद के इस जोखिम से बचने के लिए अब एक स्टडी हुई है जिसमें दावा किया गया है कि इसे ठीक किया जा सकता है. दरअसल, 65% लोग जिन्हें 65 साल से ज्यादा की उम्र में दिल का दौरा पड़ता है, वे इसके करीब आठ साल के भीतर मर जाते हैं.
टिश्यू कमजोर पड़ जाते हैं
दिल का पहला दौरा पड़ने से दिल के टिश्यू कमजोर पड़ जाते हैं और उनमें ऑक्सीजन की कमी होने के कारण वे धीरे-धीर वे मरने लगते हैं. लेकिन अब हाल ही में जानवरों पर की गई स्टडी में ये सामने आया है कि इससे बचा जा सकता है. पशु अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने एक ऐसे मैकेनिज्म की पहचान की है जिससे हार्ट टिश्यू को ट्रीट किया जा सकता है. हालांकि, अभी तक ये ट्रायल केवल स्वस्थ चूहों पर किया गया है. ये स्टडी नेचर कार्डियोवास्कुलर रिसर्च में पब्लिश की गई है.
कैसे पहुंचाता है ये नुकसान?
मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट की मानें, तो प्रोफेसर जेम्स लीपर कहते हैं, ”ज्यादातर हार्ट अटैक कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण होते हैं जो उन्हें संकुचित कर देती है. ये एथेरोमा नाम के फैट के जमा होने के कारण होता है. अगर एथेरोमा का एक टुकड़ा टूट जाता है, तो आर्टरी की दीवार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने और मरम्मत करने के लिए इसके चारों ओर एक खून का थक्का बन जाता है. ये ब्लड क्लॉट आपकी कोरोनरी आर्टरी को ब्लॉक कर सकता है जिससे दिल की मांसपेशियों को खून, ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं जिससे दिल पर फर्क पड़ता है.”
कैसे पड़ता है हार्ट अटैक?
कार्डियोमायोसाइट्स दिल में एक तरह की सेल होती है जो मांसपेशियों को सिकोड़ने के लिए जिम्मेदार होती है. दिल की धड़कन को बनाए रखने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नलिंग के जवाब में, शरीर के चारों ओर खून को निचोड़ने के लिए मांसपेशियों का यह संकुचन जरूरी होता है. जब हार्ट अटैक पड़ता है तो ऐसे में ये सेल्स क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और दिल अपनी कुछ क्षमता खो देता है.
दिल के दौरे से जुड़े जोखिम को ऐसे करें कम
हालांकि, आप हमेशा हार्ट अटैक के जोखिम को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं. लेकिन आप कुछ चीजों का ध्यान रख सकते हैं. जैसे-
-सिगरेट न पिएं और जितना ही धुएं से बचने की कोशिश करें.
-अपने हाई ब्लड शुगर लेवल और हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें. फिर चाहे वह डाइट में बदलाव करने से हो, या वजन कम करके, दवा लेकर आदि.
-रोजाना शारीरिक रूप से एक्टिव रहें.
-अगर आपका वजन ज्यादा बढ़ा हुआ है तो उसे समय रहते कंट्रोल जरूर कर लें.
-अगर आपको डायबिटीज है तो ट्रीटमेंट करवाएं और सभी सावधानियां बरतें.
-अपनी शराब की खपत को सीमित करें.
-अलग-अलग प्रकार के विटामिन और मिनरल्स से भरपूर हेल्दी फूड खाएं.