आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. इसका असर हमारी दिनचर्या से लेकर खाने-पीने की आदतों तक साफ दिखाई देता है. खासकर बच्चों को खाना खिलाने के लिए माता-पिता अक्सर मोबाइल का सहारा लेते हैं. हालांकि यह तरीका आसान लगता है, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह आदत धीरे-धीरे बच्चों और बड़ों दोनों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल रही है. चलिए जानते हैं कैसे.
खाना खाने का समय बच्चों के लिए सिर्फ पेट भरने का नहीं, बल्कि सीखने और समझने का भी होता है. इस दौरान वे माता-पिता से बातचीत करना, भाव-भंगिमा समझना और नए शब्द सीखते हैं. लेकिन जब बच्चा मोबाइल स्क्रीन में उलझा रहता है, तो उसका सामाजिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है. डॉक्टरों के अनुसार ऐसे बच्चों में स्पीच डिले की समस्या देखी जा सकती है. साथ ही वे बिना स्क्रीन के खाना खाने से मना करने लगते हैं और चिड़चिड़े हो सकते हैं.
बड़ों के लिए भी है नुकसानदायक
मोबाइल देखते हुए खाना खाने की आदत सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है. बड़े भी इसका शिकार हो रहे हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस दौरान व्यक्ति का ध्यान खाने से हट जाता है, जिससे वह जरूरत से ज्यादा खाना खा सकता है. इससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है और लंबे समय में मेटाबोलिक समस्याएं भी हो सकती हैं.
इन्सुलिन रेजिस्टेंस का बढ़ सकता है खतरा
हालांकि मोबाइल और इन्सुलिन रेजिस्टेंस के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है, लेकिन ध्यान भटकने के कारण ओवरईटिंग और अनहेल्दी फूड का सेवन बढ़ सकता है. इससे ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होता है, जो आगे चलकर इन्सुलिन रेजिस्टेंस का जोखिम बढ़ा सकता है. साथ ही आतों की सेहत खराब होने का कारण यह है कि जब लोग फोन देखकर खाना खाते हैं तो कुछ लोग खाना सही तरीके से चबाते नहीं है. इस वजह से आंतों को खाना पचाने के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है. आंतों की सेहत खराब होने से कई तरह की समस्याएं होती हैं.
स्क्रीन फ्री मील है जरूरी
एक्सपर्ट्स के अनुसार खाने के समय स्क्रीन से दूरी बनाना बेहद जरूरी है. इससे न केवल बच्चे बेहतर तरीके से सीखते हैं, बल्कि बड़ों को भी अपने खाने की मात्रा और स्वाद पर ध्यान देने में मदद मिलती है. स्क्रीन फ्री मील अपनाकर ओवरईटिंग से बचा जा सकता है और सेहत को बेहतर रखा जा सकता है.
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