रोजमर्रा के कामों में परेशानी, मीटिंग में नहीं रहता फोकस.. कहीं आप भी 'ब्रेन फॉग' वाली कैटेगरी में तो नहीं?

आजकल की ज़िदगी में लोगों को मानसिक परेशानी काफी हो गई हैं. जिसमें टेंशन, परिवार से लेकर समाज की फिक्र जैसे कारकों से चलते लोगों को काफी मानसिक परेशानी होती है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

तीस की उम्र आमतौर पर मानसिक क्षमता का मजबूत दौर माना जाता है, लेकिन आजकल कई लोग इस उम्र में ही याददाश्त कमजोर होने, ध्यान भटकने और सोचने की स्पीड धीमी पड़ने जैसी समस्याएं महसूस कर रहे हैं. कई बार मीटिंग के दौरान फोकस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है या बातचीत करते समय साधारण शब्द याद नहीं आते. जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, वे अब थकाने वाले लगने लगते हैं. इस स्थिति को अक्सर लोग गंभीर बीमारी समझ लेते हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे 'ब्रेन फॉग' से जोड़कर देखते हैं.

क्या है ब्रेन फॉग?
ब्रेन फॉग में मानसिक थकान, उलझन, फोकस करने में मुश्किल और सोचने-समझने की क्षमता में कमी महसूस होती है. असल में दिमाग शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा का उपयोग करता है. जब शरीर को पर्याप्त नींद, सही पोषण या आराम नहीं मिलता, तो सबसे पहले दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. ऐसे में दिमाग बंद नहीं होता, बल्कि 'लो पावर मोड' में काम करने लगता है.

बदलती लाइफस्टाइल बड़ी वजह
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बढ़ता काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, बच्चों की देखभाल और सोशल मीडिया पर लगातार तुलना जैसी चीजें मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं. इसके साथ ही ज्यादा स्क्रीन टाइम और डिजिटल डिवाइस का लगातार इस्तेमाल भी दिमाग को थका देता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लंबी कार्य अवधि और पर्याप्त नींद की कमी से ध्यान और वर्किंग मेमोरी कमजोर हो सकती है. वहीं सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की रिपोर्ट बताती है कि करीब एक तिहाई वयस्क पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जबकि नींद के दौरान ही दिमाग खुद को रिपेयर करता है.

पोषण की कमी भी कर सकती है असर
कई बार ब्रेन फॉग का कारण शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है. खासतौर पर विटामिन B12, विटामिन D3 और आयरन की कमी से ऊर्जा स्तर घट जाता है और ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है. अगर इसके साथ थकान, झुनझुनी, बाल झड़ना या त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी हो सकता है.

ब्रेन फॉग से बचने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव काफी मददगार हो सकता है. पर्याप्त और नियमित नींद लेना, रोजाना कम से कम 30 मिनट हल्का-फुल्का व्यायाम करना और दिनभर पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है. व्यायाम से दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे फोकस और मानसिक ऊर्जा बेहतर होती है. इसके अलावा संतुलित आहार लेना और स्क्रीन टाइम को सीमित करना भी जरूरी है.

कब करें डॉक्टर से संपर्क
अगर भूलने की समस्या इतनी बढ़ जाए कि रोजमर्रा के काम या नौकरी प्रभावित होने लगें, या अचानक भ्रम, तेज सिरदर्द, बोलने में दिक्कत या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि सही कारण का पता लगाकर समय पर इलाज किया जा सके.

 

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