World Mental Health Day 2026 क्या आपने सोचा है कि क्यों कभी-कभी बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस होती है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है या उन चीजों में भी मन नहीं लगता, जिन्हें पहले करना अच्छा लगता था. ज्यादातर लोग इन बदलावों को काम का दबाव, नींद की कमी या रोजमर्रा की परेशानियां समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन मेंटल हेल्थ के इन लक्षणों को नजरंदाज करना आपकी जिंदगी पर बड़ा असर डाल सकता है. अगर ये लक्षण लंबे समय तक बना रहे और आपकी रोज की जिंदगी पर असर डालने लगें, तो इन चीजों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है. मानसिक स्वास्थ्य मजाक नहीं है. इसे हल्के में लेने से बाद में पर्सनल और वर्क लाइफ दोनों प्रभावित हो सकती है.
मेंटल हेल्थ के इन्हीं लक्षणों पर बारीकियों से बात करते हुए दिल्ली के तुलसी हेल्थकेयर के सीईओ और सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता ने कई बातें बताई. उन्होंने बताया कि रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव और इमोशन का बार-बार अनिश्चित रूप से बदलना किसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के शुरुआती लक्षण हो सकता है. आइए उनकी ही भाषा में मेंटल हेल्थ के इन छोटे-छोटे लक्षणों को समझते हैं और इन्हें कैसे ठीक किया जा सकता है इसके बारे में भी जानते हैं.
लगातार थकान और चिड़चिड़ापन क्या मानसिक परेशानी के संकेत हैं?
लगातार थकान रहना, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी होना और उन गतिविधियों में दिलचस्पी कम हो जाना, जिन्हें करना आप पहले पसंद करते थे, कभी-कभी डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी बड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.
हालांकि, हर बार इन लक्षणों का मतलब मानसिक परेशानी होना नहीं है. नींद पूरी न होना, पोषण की कमी, हार्मोन में बदलाव या शरीर से जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं. अगर ये लक्षण दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बने रहें, रोजमर्रा के काम प्रभावित करने लगें या धीरे-धीरे बढ़ने लगें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. शुरुआत में ही इन बदलावों को पहचानने से समय पर मदद और सही इलाज मिल सकता है.
स्ट्रेस और डिप्रेशन में क्या अंतर है?
स्ट्रेस आमतौर पर बाहरी दबाव की वजह से होता है. काम की डेडलाइन, पैसों की चिंता या परिवार की जिम्मेदारियां इसकी वजह बन सकती हैं. कई बार परिस्थिति बदलने, पर्याप्त आराम मिलने या किसी का सहयोग मिलने से स्ट्रेस कम हो जाता है.
वहीं, डिप्रेशन में लंबे समय तक उदासी, निराशा, किसी काम में रुचि न रहना और ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. नींद और भूख में बदलाव भी हो सकता है. इन परेशानियों का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगता है और लक्षण अक्सर कम से कम दो हफ्ते तक बने रहते हैं. वहीं उन्होंने ये भी साफ किया कि स्ट्रेस डिप्रेशन की वजह भी बन सकता है, लेकिन दोनों एक ही चीज नहीं हैं. अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या संभालना मुश्किल हो जाए, तो विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेना जरूरी है.
हर समय थकान रहना कहीं बर्नआउट तो नहीं?
सामान्य थकान में देखा गया है कि अच्छी नींद लेने, आराम करने या थोड़े समय का ब्रेक लेने से कम हो जाती है. लेकिन लंबे समय तक तनाव में रहने, खासकर काम या लंबे समय तक किसी जिम्मेदारियों के दबाव के कारण बर्नआउट हो सकता है.
इसके संकेतों में लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, काम करने की क्षमता में कमी, ध्यान लगाने में परेशानी, भावनात्मक रूप से दूसरों से कटाव महसूस करना और रोज के कामों को लेकर नकारात्मकता या बेबसी बढ़ना शामिल है. इस समस्या में आराम करने के बाद भी पहले जैसी ऊर्जा और काम करने की इच्छा वापस नहीं आती. अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए, तो रिश्ते खराब हो सकते हैं, कामकाज पर असर पड़ सकता है और पूरी सेहत पर असर दिखाई देने लगता है. इससे बचने के लिए काम और निजी जिंदगी के बीच सीमाएं तय करना, नियमित ब्रेक लेना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है.
मानसिक सेहत बेहतर रखने के लिए रोज अपनाएं ये 5 आदतें
मानसिक सेहत का ख्याल रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें मददगार हो सकती हैं.
1. नींद का समय तय रखें- रोज एक तय समय पर सोने और उठने की कोशिश करें. पर्याप्त नींद लें और हर रात सात से नौ घंटे सोने का लक्ष्य रखें.
2. शारीरिक गतिविधि करें- रोज कम से कम 20 से 30 मिनट तक कोई शारीरिक गतिविधि करें. इसके लिए कुछ देर पैदल चलना भी अच्छा माना जाता है.
3. संतुलित खाना खाएं- अपनी डाइट में संतुलित भोजन शामिल करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें.
4. स्क्रीन टाइम घटाने की कोशिश करें- खासकर सोने से पहले मोबाइल या दूसरी स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें. काम के दौरान भी बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें.
5. करीबी लोगों से जुड़ें- अच्छे मेंटल हेल्थ के लिए परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं. किसी भरोसेमंद से अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात करें. इसके अलावा माइंडफुलनेस या गहरी सांस लेने का अभ्यास तनाव संभालने और भावनात्मक सेहत बेहतर रखने में मदद कर सकता है.
कब विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है?
अगर थकान, चिड़चिड़ापन, निराशा या किसी काम में रुचि की कमी लंबे समय तक बनी रहती है और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है, तो इसे सिर्फ सामान्य तनाव मानकर टालें नहीं. इन लक्षणों की वजह समझने के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें. समय पर मदद लेने से समस्या को पहचानने और जरूरी इलाज पहुंचने में सहायता मिल सकती है.
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