आज मिलिंद सोमन को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि कभी उनकी जिंदगी में सिगरेट और शराब की भी जगह थी. फिटनेस, अनुशासन और सेहत की बात करने वाले मिलिंद एक समय खूब स्मोकिंग करते थे और शराब भी पीते थे. लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें लगा कि ये आदतें उनकी जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही हैं. इससे बाहर निकलना आसान नहीं था, क्योंकि वे खुद इसे लत मानते थे. इंडिया टुडे हेल्थ वेल्थ समिट में मिलिंद ने अपनी जिंदगी के इसी दौर के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने धीरे-धीरे सिगरेट और शराब से दूरी बनाई.
मिलिंद की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि उनका शुरुआती जीवन खेल और अनुशासन के बीच बीता था. नौ साल की उम्र से लेकर 23 साल तक उनका पूरा ध्यान तैराकी पर रहा. वे हर हफ्ते करीब 65 किलोमीटर तैराकी का अभ्यास करते थे और अपने इवेंट में राष्ट्रीय चैंपियन भी बने. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया.
तैराकी छोड़ मॉडलिंग की दुनिया में पहुंचे
मिलिंद ने बताया कि उन्हें मॉडलिंग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. जब उन्हें पहली बार मॉडलिंग का ऑफर मिला, तब उन्हें यह भी नहीं पता था कि इसे एक पेशे के तौर पर अपनाया जा सकता है. हालांकि, इस काम में अच्छी कमाई थी, इसलिए उन्होंने ऑफर स्वीकार कर लिया. यहीं से उनकी जिंदगी का एक नया दौर शुरू हुआ. मॉडलिंग की दुनिया तैराकी के अनुशासित माहौल से काफी अलग थी. यहां उन्हें कई ऐसे अनुभव मिले, जिनसे वे पहले परिचित नहीं थे. इसी दौरान वे सिगरेट पीने और शराब पीने की आदत में पड़ गए.
सिगरेट छोड़ना चाहता था, लेकिन लत लग चुकी थी
मिलिंद ने बताया कि एक समय वे बहुत ज्यादा सिगरेट पीने लगे थे. उन्हें यह समझ आ गया था कि इसे छोड़ना जरूरी है, लेकिन लत की वजह से ऐसा कर पाना आसान नहीं था. उन्होंने कहा, 'आपको इसकी लत लग जाती है. मैं तुरंत छोड़ देता, लेकिन यह एक लत थी.' हालांकि, उन्होंने इस आदत से बाहर निकलने का फैसला किया और करीब 25 साल पहले सिगरेट पीना पूरी तरह छोड़ दिया. शराब पीने की आदत भी उनके लिए एक चुनौती थी. मिलिंद ने स्वीकार किया कि वे पहले बहुत शराब पीते थे. उन्होंने कहा कि यह भी एक लत थी, लेकिन वे इसे छोड़ने में सफल रहे.
नशे में घर लौटते तो मां नहीं खोलती थीं दरवाजा
समिट में मिलिंद ने अपनी मां उषा सोमन से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वे शराब पीकर घर लौटते थे, तो उनकी मां कई बार उन्हें घर में घुसने नहीं देती थीं. मिलिंद के मुताबिक, उनकी मां का यह व्यवहार उन्हें अपनी आदतों के बारे में सोचने पर मजबूर करता था. आज वे उस दौर को अपनी जिंदगी का सिर्फ बुरा अनुभव नहीं मानते. उनका कहना है कि इन अनुभवों से उन्हें खुद को समझने में मदद मिली. उन्होंने कहा कि उनके लिए इस दौर से गुजरना जरूरी था, क्योंकि इससे उन्होंने अपने बारे में बहुत कुछ सीखा.
रोज सिर्फ 10 मिनट करते हैं एक्सरसाइज
समिट में मिलिंद के साथ उनकी पत्नी अंकिता कोंवर और मां उषा सोमन भी मौजूद थीं. तीनों ने फिटनेस, खानपान, बढ़ती उम्र और सक्रिय जीवनशैली पर बात की. मिलिंद ने बताया कि वे रोजाना 10 मिनट से ज्यादा एक्सरसाइज नहीं करते. वे न तो जिम जाते हैं और न ही फिट रहने के लिए सप्लीमेंट पर निर्भर रहते हैं. उनके मुताबिक, फिटनेस के लिए महंगे जिम, खास डाइट या बहुत कठिन वर्कआउट जरूरी नहीं है.
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