45 के बाद भी मां बनना होगा मुमकिन, इस नई तकनीक से अपने ही अंडों से प्रेग्नेंसी होगी संभव

यह प्रक्रिया ओवरी में ब्लड फ्लो बढ़ाती है, सूजन कम करती है और कोशिकाओं को दोबारा एक्टिव करती है. इससे अंडों की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है.

Hope for Women Over 45 to Conceive
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

40 की उम्र के बाद मां बनना मुश्किल माना जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा को चुनौती दी है. एक हालिया रिसर्च में 45 और 47 साल की महिलाओं ने अपने ही अंडों से एक नई तकनीक के जरिए बच्चों को जन्म दिया है. इस नई तकनीक को ओवेरियन रीजुवेनेशन कहा जा रहा है, जो उन महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है, जो देर से मां बनना चाहती हैं.

40 के बाद मां बनने की संभावना क्यों कम होती है?
40 की उम्र के बाद महिलाओं के ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों की संख्या और गुणवत्ता तेजी से कम होने लगती है. एक स्टडी के मुताबिक, इस उम्र के बाद प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना करीब 44% रह जाती है. इसी वजह से ज्यादातर डॉक्टर 45 के बाद महिलाओं को डोनर एग का ऑप्शन देते हैं.

नई स्टडी ने उम्मीद जगी
दिसंबर 2025 में प्रकाशित एक केस स्टडी में दो महिलाओं के सफल प्रेग्नेंसी केस सामने आए हैं. एक महिला ने 46 साल की उम्र में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण किया और 47 में बच्चे को जन्म दिया. वहीं दूसरी महिला ने IVF के जरिए 45 साल में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. खास बात यह रही कि दोनों ने अपने ही अंडों का इस्तेमाल किया.

क्या है ओवेरियन रीजुवेनेशन तकनीक?
इस तकनीक में शरीर से ही दो चीजें ली जाती हैं. फैट टिश्यू से स्टेम सेल और खून से प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (PRP). PRP में ऐसे ग्रोथ फैक्टर होते हैं जो नई ब्लड वेसल्स बनाने और कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करते हैं. वहीं स्टेम सेल ओवरी के वातावरण को बेहतर बनाकर निष्क्रिय फॉलिकल्स को सक्रिय करने में मदद कर सकते हैं.

कैसे काम करती है यह तकनीक?
डॉक्टर्स के अनुसार, यह प्रक्रिया ओवरी में ब्लड फ्लो बढ़ाती है, सूजन कम करती है और कोशिकाओं को दोबारा एक्टिव करती है. इससे अंडों की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है. एक केस में इलाज के 6 महीने बाद महिला के अंडों की संख्या बढ़ी और वह प्राकृतिक रूप से प्रेग्नेंट हो गई.

हर किसी के लिए नहीं है यह विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं है. जिन महिलाओं को गंभीर बीमारियां, कैंसर या अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनके लिए यह उपचार सुरक्षित नहीं माना जाता.

IVF में भी सफलता दर सीमित
एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, 40-41 साल की महिलाओं में IVF के जरिए एक साइकिल में सफल जन्म की संभावना 13% होती है, जो तीन साइकिल के बाद 25% तक पहुंचती है. वहीं 44 साल के बाद यह संभावना घटकर सिर्फ 2% रह जाती है. ऐसे में नई तकनीक उम्मीद जरूर देती है.

 

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