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Organ Donation: Ahmedabad में ब्रेन डेड मजदूर ने 3 मरीजों को दी नई जिंदगी, दान किया किडनी और लीवर

गुजरात के अहमदाबाद में एक ब्रेन डेड मजदूर ने अंगदान कर 3 लोगों को नई जिंदगी दी. सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद अर्जुन जी ठाकोर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया.

Organ Donation (Photo-Unsplash)
अतुल तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 7:59 AM IST

अंगदान को महादान माना गया है. इससे लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है. जीवित और मृत दोनों व्यक्ति अंगदान कर सकते हैं. जीवित व्यक्ति लीवर और किडनी तो मरने के बाद किडनी, हार्ट, लिवर, आंखों का कॉर्निया और पैंक्रियाज डोनेट किया जा सकता है. हर साल अंगदान दिवस भी मनाया जाता है और लोगों को इसको लेकर जागरूक भी किया जाता है. जो लोग जीते जी अंगदान करना चाहते हैं उनके लिए सरकार ने वेबसाइट बनाई है जहां वे खुद को रजिस्टर कर सकते हैं.  विश्व लीवर दिवस के मौके पर गुजरात के अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 150 वां अंगदान हुआ है. डीसा के अर्जुन जी ठाकोर मजदूरी कर गुजारा करते थे. सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल होने के बाद उन्हें डीसा के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया लेकिन डॉक्टरों की टीम ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया. जिसके बाद उनका अंगदान किया गया.

3 लोगों को मिली नई जिंदगी

अर्जुन जी ठाकोर को ब्रेन डेड घोषित किए जाने की जानकारी अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट को प्राप्त हुई तो उन्होंंने ब्रेन डेड अर्जुन जी की पत्नी, भाई और परिवार के सदस्यों से संपर्क कर उन्हें ब्रेन डेड और अंगदान के बारे में जानकारी दी. जिसके बाद अंगदान की परमिशन मिलने पर उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल में शिफ्ट किया गया और उनके अंगदान से दो किडनी और एक लीवर प्राप्त हुए, जिसकी वजह से तीन लोगों को नवजीवन प्राप्त हुआ.

बीते 3 साल में 467 लोगों को मिला नवजीवन

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 150वें अंगदान को लेकर अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉक्टर राकेश जोशी ने कहा कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पिछले तीन साल में 150 अंगदान हुए हैं. 150 अंगदान के माध्यम से अब तक 483 अंगों का दान प्राप्त हुआ है. जिसकी मदद से 467 लोगों को नवजीवन प्राप्त हुआ है.

 

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