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20 करोड़ के घटिया ग्लूकोमीटर का खेल, 15 हजार स्वस्थ लोगों को बना दिया डायबिटीज मरीज, अब जांच के आदेश जारी

राजस्थान में मेडिकल उपकरणों की सप्लाई को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है. राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से सप्लाई किए गए ग्लूकोमीटर अब विवादों में हैं.

15,000 healthy people were declared diabetic patients
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:48 PM IST

राजस्थान में मेडिकल उपकरणों की सप्लाई को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है. राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से सप्लाई किए गए ग्लूकोमीटर अब विवादों में हैं. जांच में खुलासा हुआ है कि इन उपकरणों ने पिछले दो साल में करीब 15 हजार स्वस्थ लोगों को गलत तरीके से डायबिटीज मरीज बना दिया. यह मामला प्रदेश के जयपुर, भरतपुर, सीकर, झालावाड़, डीग और चौमूं सहित करीब 20 सरकारी अस्पतालों में सामने आया है.

गलत रीडिंग से बढ़ी परेशानी
मामले की शुरुआत तब हुई जब मरीजों की रिपोर्ट पर संदेह जताया गया. इसके बाद सरकार ने शुरुआती स्तर पर जांच के आदेश दिए. सीएमएचओ और पीएमओ स्तर पर कराई गई जांच में सामने आया कि ग्लूकोमीटर से बार-बार गलत रीडिंग मिल रही थी. कई मामलों में शुगर लेवल सामान्य होने के बावजूद उसे ज्यादा दिखाया गया.

उदाहरण के तौर पर, एक मरीज की वास्तविक शुगर 75 एमजी प्रति डीएल थी, लेकिन ग्लूकोमीटर ने 133 एमजी प्रति डीएल दिखाया. इसी तरह एक अन्य मरीज की 160 की जगह 266 और एक व्यक्ति की 112 की जगह 167 एमजी प्रति डीएल रीडिंग दर्ज की गई. कई मामलों में रीडिंग शून्य या तीन से चार गुना तक अधिक पाई गई.

अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
चिकित्सा विभाग द्वारा गठित जांच टीम में चिकित्सा अधिकारी, बायोमेडिकल इंजीनियर, लैब टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारी शामिल थे. टीम ने अस्पतालों में मरीजों की दो-दो बार जांच कराई और सैंपल टेस्ट भी किए. रिपोर्ट में कई सैंपल्स में गंभीर गड़बड़ी सामने आई.

भरतपुर से भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि ग्लूकोमीटर की रीडिंग वास्तविक जांच से मेल नहीं खा रही थी. इसके बावजूद संबंधित कंपनी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.

चार महीने बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर
इस गंभीर मामले में चार महीने बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होना सवाल खड़े करता है. आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डायबिटीज के दवा लेना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे पेट दर्द, डायरिया, मांसपेशियों में दर्द, विटामिन बी12 की कमी, त्वचा संबंधी समस्याएं और वजन बढ़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कुछ मामलों में शुगर लेवल बहुत कम होने से व्यक्ति बेहोश होकर कोमा तक में जा सकता है.

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