दुनियाभर में बढ़ते तापमान का असर अब सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की रोजाना की जिंदगी और सेहत पर भी असर डाल सकता है. The Lancet Global Health में पब्लिश एक नई स्टडी के मुताबिक, 2050 तक बढ़ती गर्मी के कारण दुनियाभर में शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) में कमी आ सकती है. इसका सीधा असर लोगों की सेहत, मृत्यु दर और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
हर बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ेगी बीमारियां
स्टडी में 156 देशों के 2000 से 2022 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. रिसर्च के अनुसार, अगर किसी क्षेत्र में औसत तापमान 27.8°C से ऊपर जाता है, तो हर अतिरिक्त महीने में शारीरिक निष्क्रियता (inactivity) लगभग 1.5% बढ़ सकती है. लो और मिडिल इनकम देशों में यह बढ़ोतरी 1.85% तक हो सकती है, जबकि हाई इनकम देशों पर इसका असर कम दिखेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक इस वजह से हर साल 4.7 लाख से 7 लाख तक प्री मैच्योर डेथ हो सकते हैं. इसके अलावा, कामकाज और उत्पादकता में कमी के कारण हर साल 2.4 से 3.68 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
सेंट्रल अमेरिका
कैरेबियन
पूर्वी अफ्रीका (Sub-Saharan Africa)
दक्षिण-पूर्व एशिया के इक्वेटोरियल इलाके
इन क्षेत्रों में गर्मी बढ़ने पर शारीरिक गतिविधि में 4% से ज्यादा गिरावट देखी जा सकती है.
गर्मी में क्यों कम होती है एक्टिविटी?
तेज गर्मी का असर सीधे शरीर पर पड़ता है, जिससे लोगों की शारीरिक गतिविधि अपने आप कम हो जाती है. ज्यादा तापमान होने पर दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और शरीर को ठंडा रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है. इसी वजह से व्यक्ति जल्दी थकान महसूस करने लगता है. इसके साथ ही तेज धूप और गर्म हवा में बाहर जाकर एक्सरसाइज करना भी खतरनाक हो सकता है.
पहले से ही बड़ी समस्या है फिजिकल इनएक्टिविटी
World Health Organization के अनुसार, दुनिया में हर 3 में से 1 व्यक्ति जरूरी शारीरिक गतिविधि नहीं करता. यानी लोग पहले से ही कम एक्टिव हैं और बढ़ती गर्मी इस समस्या को और बढ़ा सकती है. फिजिकल इनएक्टिविटी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) का बड़ा कारण है और करीब 5% मौतों के लिए जिम्मेदार है.