भारत में तंबाकू के इस्तेमाल को लेकर दो अलग तस्वीरें सामने आई हैं. एक तरफ पिछले पांच साल में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों का प्रतिशत घटा है, वहीं दूसरी ओर तंबाकू खरीदने वाले घरों की संख्या बढ़ी है. इसी बीच एक नई स्टडी में सामने आया है कि पुरुषों में मुंह के कैंसर के आधे से ज्यादा मामलों के लिए खैनी, गुटखा जैसे बिना धुआं वाले तंबाकू उत्पाद जिम्मेदार हो सकते हैं. महिलाओं में भी मुंह के कैंसर के मामलों में तंबाकू की बड़ी भूमिका सामने आई है.
पुरुषों में मुंह के 57% कैंसर का संबंध बिना धुएं वाले तंबाकू से
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, पुरुषों में मुंह के कैंसर के अनुमानित 57.3% मामले बिना धुएं वाले तंबाकू से जुड़े हो सकते हैं. इनमें गुटखा और खैनी जैसे उत्पाद शामिल हैं. महिलाओं में मुंह के कैंसर के करीब 73.4% मामलों का संबंध किसी न किसी रूप में तंबाकू के इस्तेमाल से होने का अनुमान है.
शोधकर्ताओं ने 2019 से 2024 के बीच केरल के एक कैंसर केंद्र में आए 11,285 कैंसर मरीजों और 7,154 ऐसे लोगों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिन्हें कैंसर नहीं था. इसके आधार पर उन्होंने तंबाकू से जुड़े कैंसर के संभावित खतरे का आकलन किया. ये अनुमान बताते हैं कि तंबाकू का इस्तेमाल खत्म होने पर कैंसर के कितने मामलों को संभावित रूप से रोका जा सकता है.
गुटखा और खैनी मुंह के लिए ज्यादा नुकसानदेह
स्टडी के अनुसार, पुरुषों में बिना धुएं वाले तंबाकू का संबंध होंठ के कैंसर के 61.8% और मुंह के कैंसर के 57.3% मामलों से हो सकता है. इसकी वजह यह है कि गुटखा और खैनी जैसे उत्पाद सीधे मुंह और जीभ के संपर्क में रहते हैं. इनमें मौजूद हानिकारक तत्व लंबे समय तक मुंह के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सिगरेट और बीड़ी पीने से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है. अध्ययन में धूम्रपान का संबंध गले के निचले हिस्से और स्वरयंत्र के कैंसर से भी पाया गया. यानी केवल सिगरेट छोड़ने पर ध्यान देना काफी नहीं, गुटखा और खैनी जैसे उत्पादों से दूरी बनाना भी जरूरी है.
महिलाओं में भी तंबाकू से कैंसर का खतरा
स्टडी में महिलाओं के लिए भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए. महिलाओं में बिना धुएं वाले तंबाकू का संबंध होंठ के कैंसर के अनुमानित 68.8% और मुंह के कैंसर के 68% मामलों से पाया गया. हालांकि, कुछ आंकड़ों में अनिश्चितता ज्यादा थी, इसलिए इन अनुमानों को सावधानी से समझने की जरूरत है.
पांच साल में तंबाकू का इस्तेमाल थोड़ा घटा
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, 15 साल या उससे अधिक उम्र के पुरुषों में तंबाकू इस्तेमाल करने वालों का प्रतिशत 38% से घटकर 36.3% हो गया. महिलाओं में यह 8.9% से घटकर 8.4% हुआ. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू का इस्तेमाल अब भी ज्यादा है. ग्रामीण पुरुषों में 41.1% और शहरी पुरुषों में 26.2% तंबाकू इस्तेमाल करने की बात सामने आई.
तंबाकू खरीदने वाले घरों की संख्या बढ़ी
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के फरवरी 2026 के एक अध्ययन के अनुसार, 2011-12 से 2023-24 के बीच तंबाकू खरीदने वाले घरों का प्रतिशत बढ़ा. ग्रामीण भारत में यह 59.3% से बढ़कर 68.6% और शहरी भारत में 34.9% से बढ़कर 45.6% हो गया. ग्रामीण इलाकों में गुटखा खरीदने वाले घरों का प्रतिशत 5.3% से बढ़कर 30.4% पहुंच गया. इससे पता चलता है कि तंबाकू के अलग-अलग उत्पाद अब भी बड़ी संख्या में घरों तक पहुंच रहे हैं.
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