Cancer पर रिसर्च में खुलासा, रात को नींद में तेजी से हमला करती हैं कैंसर कोशिकाएं

एक रिसर्च में कैंसर को लेकर लेकर बड़ा खुलासा है. शोध के मुताबिक रात में सोते वक्त कैंसर कोशिकाएं तेजी से अटैक करती हैं. वैज्ञानिकों की एक टीम ने कैंसर पीड़ित 30 महिलाओं पर रिसर्च किया और नतीजों ने सबको हैरान कर दिया.

रात को सोते वक्त कैंसर कोशिकाएं तेजी से हमला करती हैं- स्टडी
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2022,
  • अपडेटेड 5:21 PM IST
  • सोते वक्त तेजी से हमला करती हैं कैंसर कोशिकाएं
  • कैंसर पीड़ित 30 महिलाओं पर किया गया रिसर्च

कैंसर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. एक रिसर्च में पाया गया कि दिन के मुकाबले रात में कैंसर कोशिकाएं ज्यादा एक्टिव होती हैं और बॉडी पर ज्यादा अटैक करती हैं. रिसर्च के मुताबिक  ये कोशिकाएं सबसे ज्यादा घातक तब होती है जब वो बॉडी में रक्तप्रवाह में नई जगहों पर जाती हैं. इसे मेटास्टेसिस (Metastasis) कहते हैं. ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित रोगियों में रात के वक्त ब्लड में अटैक की आशंका ज्यादा होती है.
कैंसर पर ये रिसर्च साइंस जनरल नेचर (Nature) में प्रकाशित हुआ है. स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कैंसर बायोलॉजिस्ट निकोला एसीटो (Nicola Aceto) ने कहा कि रिसर्च में साफ हो गया है कि जब मरीज सो रहे होते हैं तो ट्यूमर जाग जाते हैं. 

साल 2007 में कैंसर को लेकर एक लॉन्ग टर्म रिसर्च हुआ था. जिसमें पाया गया कि ऑल अवर में काम करने वालों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है. इसका जिक्र करते हुए एसीटो ने बताया कि एक व्यक्ति की सर्कैडियन क्लॉक (circadian clock) विभिन्न जीन्स से नियंत्रित होती है और विशिष्ट मॉलेकुलस शरीर के मल्टीपल फंक्शन्स को प्रभावित करती है. जिसमें मेटाबॉलिज्म और नींद शामिल है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में शोधकर्ताओं ने सोचा था कि कैंसर कोशिकाएं इतनी खराब होने के बाद इतना असर नहीं दिखा सकती हैं. 

30 मरीजों पर हुआ शोध-
इस रिसर्च के लिए एसीटो और उनकी टीम ने ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित 30 महिलाओं के ब्लड का इस्तेमाल किया. टीम ने दिन में दो बार ब्लड लिए. एक सुबह 4 बजे और दूसरे सुबह 10 बजे ब्लड एकत्रित किए.
शोधकर्ताओं ने पाया कि सुबह 4 बजे लिए गए ब्लड सैंपल में 80 फीसदी CTCs पाए गए. जिस वक्त सैंपल लिए गए, उस वक्त मरीज आराम कर रहे थे. एसीटो ने कहा कि पहले तो मैं हैरान हुआ. लेकिन डेटा से सबकुछ साफ हो गया और हम लोग उत्साहित थे. एसीटो कहते हैं कि ये रिसर्च मेटास्टेसिस को समझने के लिए एक अच्छा कदम है. ये कैंसर पीड़ितों के लिए लॉन्ग टर्म के लिए फायदेमंद होगा.

नींद नुकसानदायक नहीं- जून मेंग
नींद में कैंसर कोशिकाएं ज्यादा अटैक करती हैं. इसका मतलब ये नहीं है कि नींद नुकसानदायक है. ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के एक क्रोनोबायोलॉजिस्ट किंग जून मेंग ने कहा कि नींद कोई दुश्मन नहीं है. कुछ रिसर्च में पता चला है कि जिन लोगों को कैंसर है और वो रात में 7 घंटे से कम सोते हैं तो उनकी मौत का खतरा ज्यादा होता है. इसका मतलब ये है कि पर्याप्त नींद लेने से कैंसर का कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा कि कैंसर कोशिकाएं ब्लड में जाने के लिए 24 घंटे में एक विशेष फेज को पसंद करती हैं.

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