White Sugar vs Jaggery: सुबह की एक कप चाय हो या घर में बनी आपकी पसंदीदा मिठाई, मीठा हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन जैसे-जैसे लोग सेहत को लेकर जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे सफेद चीनी की जगह गुड़ जैसे प्राकृतिक विकल्पों की ओर रुझान बढ़ रहा है. दोनों ही गन्ने से बनते हैं, फिर भी इनके पोषण, प्रोसेसिंग और सेहत पर असर में बड़ा फर्क है. ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों में से सेहत के लिए क्या ज्यादा बेहतर है? तो आइए जानते हैं.
क्या है सफेद चीनी?
सफेद चीनी या रिफाइंड शुगर गन्ने के रस को शुद्ध करके बनाई जाती है. इस प्रक्रिया में शीरा (मोलासेस) निकाल दिया जाता है, जिसमें मौजूद खनिज और पोषक तत्व हट जाते हैं. नतीजा होता है—शुद्ध सुक्रोज के चमकदार क्रिस्टल. सफेद चीनी तुरंत ऊर्जा तो देती है और स्वाद साफ होता है, लेकिन इसमें फाइबर, विटामिन या खनिज नहीं होते. यही वजह है कि इसे खाली कैलोरी कहा जाता है.
क्या है गुड़?
गुड़ गन्ने के रस को उबालकर बनाया जाता है, जिसमें शीरा अलग नहीं किया जाता. इसी कारण इसका रंग भूरा और स्वाद हल्का कैरमल जैसा होता है. चीनी के मुकाबले गुड़ कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की थोड़ी मात्रा बनी रहती है.
गुड़ के स्वास्थ्य लाभ
गुड़ में मौजूद प्राकृतिक आयरन खून की कमी यानी एनीमिया से बचाव में सहायक हो सकता है.
भारत में भोजन के बाद गुड़ खाने की परंपरा है, जिससे पाचन बेहतर माना जाता है.
माना जाता है कि गुड़ शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है.
गर्म गुड़ में अदरक या काली मिर्च मिलाकर लेने से गले की खराश में आराम मिल सकता है.
दोनों के नुकसान
गुड़ भी आखिरकार शुगर ही है. अधिक मात्रा में लेने पर वजन बढ़ सकता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह भी नुकसानदेह हो सकता है.
वहीं सफेद चीनी केवल कैलोरी देती है, पोषण नहीं. इसका ज्यादा सेवन मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है.
तो क्या गुड़ ज्यादा सेहतमंद है?
जी हां, लेकिन सीमित रूप में. गुड़ में मौजूद खनिज और अपेक्षाकृत कम ग्लाइसेमिक असर इसे सफेद चीनी से थोड़ा बेहतर बनाते हैं. फिर भी, यह मीठा ही है.
अगर आप सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो जहां संभव हो सफेद चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें, लेकिन मात्रा पर नियंत्रण रखें.