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Air Pollution Side Effects: हृदय और स्ट्रोक संबंधी कई बीमारियों का कारण बन रहा बढ़ता वायु प्रदूषण...WHO ने दी चेतावनी, मां के भ्रूण को भी खतरा

बढ़ते प्रदूषण के कारण मधुमेह और न्यूरोडीजेनेरेटिव जैसे परिणाम सामने आ रहे हैं. दिल्ली और उसके पड़ोसी शहरों में हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में आ गई है. अपने छोटे आकार के कारण, कुछ वायु प्रदूषक फेफड़ों के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रवेश करने में सक्षम होते हैं और पूरे शरीर में फैल जाते हैं.

Pollution Side Effects
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 9:50 AM IST
  • भ्रूण के स्वास्थ्य पर हो सकता है असर
  • WHO ने जारी की चेतावनी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीरता ने लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर कर दिया है. बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. इसी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बन सकता है जो समय से पहले मौत के सामान्य कारण हैं. इसके कारण मधुमेह और न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थितियों जैसे अन्य प्रभावों के प्रमाण भी सामने आ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि शहरों में जमे स्मॉग से लेकर घर के अंदर धुएं तक, वायु प्रदूषण स्वास्थ्य और जलवायु के लिए एक बड़ा खतरा है.

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दिल्ली और उसके पड़ोसी शहरों में हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में आ गई है. रविवार (6 नवंबर) को शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 339 था, जो एक दिन पहले 381 था. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शुक्रवार (4 नवंबर) को यह 447 था. गुरुवार को यह 'सिवियर प्लस' श्रेणी से एक पायदान कम 450 पर पहुंच गया था.

वायु प्रदूषण हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है?
वायु प्रदूषण से जोखिम का मुख्य मार्ग रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट के माध्यम से होता है यानी सांस द्वारा. इन प्रदूषकों में सांस लेने से हमारे पूरे शरीर में कोशिकाओं में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव, इम्यूनोसप्रेशन और म्यूटेशन होता है, जो फेफड़ों, हृदय, मस्तिष्क सहित अन्य अंगों को प्रभावित करता है और अंततः बीमारी का कारण बनता है.

वायु प्रदूषण से कौन से अंग प्रभावित होते हैं?
वायु प्रदूषण से शरीर का लगभग हर अंग प्रभावित हो सकता है. अपने छोटे आकार के कारण, कुछ वायु प्रदूषक फेफड़ों के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रवेश करने में सक्षम होते हैं और पूरे शरीर में फैल जाते हैं, जिससे प्रणालीगत सूजन और कैरिसीनिजेनिसिटी(carcinogenicity)हो जाती है.

वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?
वायु प्रदूषण के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं. वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाले विशिष्ट रोग परिणामों में स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, फेफड़े का कैंसर, निमोनिया और मोतियाबिंद (केवल घरेलू वायु प्रदूषण) शामिल हैं.

भ्रूण के स्वास्थ्य पर क्या होता है असर ?
इसके अलावा गर्भावस्था पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है. इसके अलावा कैंसर, मधुमेह और तंत्रिका संबंधी रोगों का कारण भी बन सकता है. वायु प्रदूषण के लिए मातृ जोखिम प्रतिकूल जन्म परिणामों से जुड़ा है, जैसे जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म आदि. साक्ष्य के बढ़ते शरीर से यह भी पता चलता है कि वायु प्रदूषण बच्चों में मधुमेह और तंत्रिका संबंधी विकास को प्रभावित कर सकता है.

वायु प्रदूषण के संपर्क में कितनी देर आने से बढ़ सकती है समस्या?
वायु प्रदूषकों के अल्पकालिक और दीर्घकालिक संपर्क दोनों के कारण बच्चों और वयस्कों में स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. जोखिम का स्तर और अवधि जिसे 'सुरक्षित' माना जा सकता है, प्रदूषक के साथ-साथ संबंधित बीमारी के परिणामों से भिन्न होता है. कुछ प्रदूषकों के लिए, ऐसी कोई सीमा नहीं है जिसके नीचे कोई प्रतिकूल प्रभाव न हो. उदाहरण के लिए, पार्टिकुलेट मैटर के उच्च स्तर के संपर्क में आने से फेफड़े की कार्यक्षमता कम हो सकती है, श्वसन संक्रमण हो सकता है और अल्पकालिक जोखिम से अस्थमा बढ़ सकता है. जबकि सूक्ष्म कणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से व्यक्ति में स्ट्रोक, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.


 

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