डेंगू का बुखार उतर जाने और प्लेटलेट्स सामान्य होने के बाद ज्यादातर लोगों को लगता है कि बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है. लेकिन हकीकत यह है कि कई मरीजों को हफ्तों तक कमजोरी, थकान और शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती रहती है. कुछ लोगों को सीढ़ियां चढ़ने, थोड़ी देर चलने या रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होती है. ऐसा क्यों होता है ये समझने के लिए GNT ने मैक्स हॉस्पिटल, साकेत के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. रोमेल टिक्कू से बात की. उन्होंने बताया डेंगू सिर्फ बुखार नहीं है. यह शरीर की इम्यूनिटी, मांसपेशियों और ऊर्जा भंडार पर गहरा असर डालता है. यही वजह है कि ठीक होने के बाद भी कमजोरी लंबे समय तक बनी रह सकती है.
डेंगू से ठीक होने के बाद कमजोरी क्यों महसूस होती है?
डेंगू वायरस शरीर में पहुंचने के बाद इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर देता है. संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर बड़ी मात्रा में साइटोकाइन्स नामक रसायन छोड़ता है. कई बार इनकी मात्रा इतनी ज्यादा हो जाती है कि पूरे शरीर में सूजन जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. इसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहा जाता है. इस प्रक्रिया में मांसपेशियों, जोड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है. बुखार ठीक होने के बाद शरीर इन क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करता है, जिसमें समय लगता है. यही कारण है कि मरीज लंबे समय तक थका हुआ महसूस कर सकता है.
प्लेटलेट्स और खून की कमी भी बनती है वजह
डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से कम हो जाते हैं. कई मामलों में लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की संख्या भी प्रभावित होती है. लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं. जब ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है तो मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. व्यक्ति को कमजोरी, सांस फूलना और सुस्ती महसूस हो सकती है. इसके अलावा संक्रमण से लड़ते-लड़ते इम्यून सिस्टम भी थक जाता है, जिससे रिकवरी में समय लगता है.
शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी का क्या असर पड़ता है?
डेंगू के दौरान तेज बुखार, भूख कम लगना, उल्टी और कम पानी पीने जैसी समस्याएं आम हैं. इससे शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. कई बार डेंगू लिवर की कार्यक्षमता को भी अस्थायी रूप से प्रभावित करता है. इससे शरीर भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों का सही उपयोग नहीं कर पाता. परिणामस्वरूप ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है और कमजोरी लंबे समय तक बनी रह सकती है.
क्या डेंगू नसों और मांसपेशियों को भी प्रभावित कर सकता है?
हां. कुछ मामलों में डेंगू सीधे मांसपेशियों या नसों को प्रभावित कर सकता है. इससे मांसपेशियों में सूजन (मायोसाइटिस) हो सकती है, जिसके कारण हाथ-पैरों में ज्यादा कमजोरी महसूस होती है. बहुत कम मामलों में Guillain-Barré Syndrome जैसी गंभीर स्थिति भी विकसित हो सकती है, जिसमें नसें प्रभावित होती हैं. यदि कमजोरी तेजी से बढ़ रही हो, शरीर के किसी एक हिस्से में ज्यादा हो या सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
क्या है पोस्ट-डेंगू फटीग सिंड्रोम?
डॉक्टर इस स्थिति को पोस्ट-डेंगू फटीग सिंड्रोम (PDFS) कहते हैं. इसमें मरीज को लंबे समय तक थकान, मांसपेशियों में दर्द, मानसिक थकावट, नींद की समस्या, ध्यान लगाने में कठिनाई और शारीरिक क्षमता में कमी महसूस हो सकती है. डेंगू से ठीक होने वाले आधे से ज्यादा मरीजों में दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक ये लक्षण बने रह सकते हैं. कुछ लोगों में यह समस्या कई महीनों तक भी रह सकती है.
डेंगू से रिकवरी जल्दी कैसे हो सकती है?
रिकवरी के दौरान पर्याप्त आराम सबसे जरूरी है. रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लें. भोजन में प्रोटीन से भरपूर चीजें जैसे दाल, दूध, पनीर, अंडे और हरी सब्जियां शामिल करें. पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें. हल्की शारीरिक गतिविधियां जैसे धीमी गति से टहलना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन शुरुआत में भारी व्यायाम और ज्यादा मेहनत वाले कामों से बचना चाहिए.
डेंगू कैसे होता है?
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) नामक मच्छर के काटने से फैलती है. यह मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है. यदि कोई संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो वायरस फैल सकता है.
डेंगू बुखार के 10 प्रमुख लक्षण क्या हैं?
डेंगू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, मतली, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते और भूख कम लगना शामिल हैं. गंभीर मामलों में नाक या मसूड़ों से खून आना और प्लेटलेट्स तेजी से गिरना भी देखा जा सकता है.
डेंगू को कैसे रोका जा सकता है?
डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों से बचना है. घर और आसपास पानी जमा न होने दें. कूलर, गमले, टायर और पानी रखने वाले बर्तनों को नियमित रूप से साफ करें. पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें और मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें. सुबह और शाम के समय विशेष सावधानी बरतें क्योंकि इसी समय एडीज मच्छर सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है.