अपना ही पेशाब पीती है ये महिला, कारण जान उड़ जाएंगे आपके होश

एक महिला का दावा है कि उसने अपने मूत्र का उपयोग करके अपनी त्वचा में जबरदस्त बदलाव किया है. लूसी ऑरा का कहना है कि, इसमें मेलेनिन होता है जो त्वचा की रंगत निखारता है, क्रिएटिन होता है जो मांसपेशियों की शक्ति बढ़ाता है, स्टेम सेल्स होते हैं.

Lucy Aura
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

क्या आपने कभी सोचा है कि कोई व्यक्ति अपने आप को सुंदर बनाने के लिए अपना ही पेशाब पी सकता है? जी हां, ऐसा ही ऑस्ट्रेलिया की एक 44 वर्षीय महिला ने दावा किया है. उसका कि अपनी ही यूरिन (मूत्र) का सेवन और इस्तेमाल करके उसने अपनी त्वचा और सेहत में बड़ा बदलाव पाया है.

क्वींसलैंड के कुरांडा में रहने वाली लूसी ऑरा का कहना है कि कुछ साल पहले तक उनकी त्वचा दाग-धब्बों वाली, सूजन युक्त, तैलीय और बार-बार दाने, रैशेज व कीड़े के काटने की समस्या से ग्रस्त रहती थी. लेकिन साल 2021 में उन्होंने पहली बार यूरिन थेरेपी आजमाई. लूसी के मुताबिक, उन्होंने दो स्वस्थ दिखने वाली महिलाओं से इस पद्धति के बारे में सुना और फिर खुद इसे अपनाने का फैसला किया.

चेहरे पर भी लगाती है पेशाब
लूसी बताती हैं कि वह रोजाना अपना ताजा मूत्र एक कप में लेकर पीती हैं. जो हिस्सा नहीं पीतीं, उसे एक जार में इकट्ठा कर अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करती हैं. उनका दावा है कि वह इसे बालों और त्वचा पर लगाती हैं, इससे दांत भी ब्रश करती हैं, गरारे करती हैं, यहां तक कि कान, नाक और आंखों में भी उपयोग करती हैं. उनका कहना है कि जब उन्हें शरीर को डिटॉक्स करने की जरूरत महसूस होती है, तब वह दिनभर इसे पीती हैं, जिससे शरीर से “टॉक्सिन” बाहर निकलते हैं.

यूरिन थेरेपी ने उनके गट हेल्थ को बेहतर किया
लूसी का दावा है कि इस थेरेपी से उनकी त्वचा पूरी तरह बदल गई है. पेट से जुड़ी कोई भी समस्या उनकी त्वचा पर नजर आती थी, लेकिन यूरिन थेरेपी ने उनके गट हेल्थ को बेहतर किया और खानपान की आदतें भी बदल दीं. वह यह भी दावा करती हैं कि मूत्र में मौजूद तत्व जैसे मेलानिन, क्रिएटिन, स्टेम सेल्स और हार्मोन त्वचा व शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं. उनके अनुसार, यह थेरेपी शरीर को शुद्ध करती है और परजीवियों को खत्म करती है.

जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञ इन दावों को खारिज करते हैं.  डॉक्टरों के अनुसार, यह धारणा गलत है कि मूत्र पूरी तरह से स्टरल होता है. किडनी से निकलते समय यह अपेक्षाकृत साफ हो सकता है, लेकिन शरीर से बाहर आते-आते इसमें बैक्टीरिया शामिल हो जाते हैं. मूत्र में यूरिया, क्रिएटिनिन, नमक और अन्य अपशिष्ट पदार्थ होते हैं. इसे दोबारा पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है.

विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति दवाइयां ले रहा है, तो उन दवाओं के अवशेष भी मूत्र में मौजूद रहते हैं. ऐसे में मूत्र पीना शरीर में दोबारा रासायनिक तत्व पहुंचाने जैसा हो सकता है. त्वचा पर लगाने से जलन, खुजली या यूरिन डर्मेटाइटिस जैसी समस्या हो सकती है. अगर त्वचा पर घाव या मुंहासे हों, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यहां तक कि अमेरिकी सेना की फील्ड मैनुअल में भी सर्वाइवल स्थिति में मूत्र पीने से मना किया गया है, क्योंकि इसमें मौजूद अधिक नमक प्यास और बीमारी बढ़ा सकता है.

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