WORLD ALLERGY WEEK: बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाती है एलर्जी? बार-बार छींक, नाक बहना और आंखों में खुजली हो सकते हैं मानसून एलर्जी के संकेत

मानसून के दौरान वातावरण में नमी काफी बढ़ जाती है. नमी की वजह से घरों की दीवारों, बाथरूम, किचन, पुराने कपड़ों और बंद कमरों में फंगस तेजी से पनपने लगती है. इसके अलावा बारिश के बाद हवा में मौजूद धूल और परागकण भी अलग तरह से फैलते हैं.

WORLD ALLERGY WEEK
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली ,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:32 AM IST
  • बारिश में एलर्जी क्यों बढ़ जाती है?
  • किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है?

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन यह एलर्जी का खतरा भी लेकर आता है. मानसून शुरू होते ही कई लोगों को लगातार छींक आना, नाक बहना, आंखों में खुजली, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. दरअसल बारिश के दिनों में भीगे जूते-मोजे पहनना, कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना आम बात है. इससे बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. 

डॉक्टर के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह हवा में बढ़ने वाले फंगस (मोल्ड), धूल के कण, नमी और परागकण (पोलन) हैं. बरसात के मौसम में वातावरण में नमी और गीलापन बढ़ जाता है. यही नमी बैक्टीरिया और फंगस को पनपने का मौका देती है. जिससे खुजली, लाल चकत्ते, फोड़े-फुंसी, दाने और दुर्गंध जैसी स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ जाती हैं. अगर इन लक्षणों को बार-बार नजरअंदाज किया जाए, तो एलर्जी लंबे समय तक परेशान कर सकती है.

बारिश में एलर्जी क्यों बढ़ जाती है?
मानसून के दौरान वातावरण में नमी काफी बढ़ जाती है. नमी की वजह से घरों की दीवारों, बाथरूम, किचन, पुराने कपड़ों और बंद कमरों में फंगस तेजी से पनपने लगती है. इसके अलावा बारिश के बाद हवा में मौजूद धूल और परागकण भी अलग तरह से फैलते हैं. धूल में रहने वाले सूक्ष्म जीव (डस्ट माइट्स) भी नमी में तेजी से बढ़ते हैं. यही चीजें एलर्जी का कारण बनती हैं.

मानसून एलर्जी के सामान्य लक्षण

  • लगातार छींक आना

  • नाक बहना या बंद रहना

  • आंखों में खुजली या पानी आना

  • गले में खराश या खुजली

  • खांसी आना

  • सांस लेने में तकलीफ या घरघराहट

  • त्वचा पर लाल चकत्ते या खुजली

किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है?
मानसून एलर्जी हर किसी को नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक होता है. जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या है, उनमें बारिश के मौसम में लक्षण बढ़ सकते हैं. छोटे बच्चों और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण वे भी जल्दी प्रभावित होते हैं. इसके अलावा, जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है या जिनके घर में नमी, सीलन और फंगस की समस्या रहती है, उनमें एलर्जी होने की आशंका ज्यादा रहती है. पालतू जानवर रखने वाले लोगों में भी बालों और धूल के कणों के कारण मानसून के दौरान एलर्जी का जोखिम बढ़ सकता है.

एलर्जी और वायरल संक्रमण में क्या फर्क है?

  • कई लोग एलर्जी को सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं.

  • एलर्जी में बार-बार छींक आती है, आंखों और नाक में खुजली होती है तथा नाक से साफ पानी निकलता है. आमतौर पर बुखार नहीं होता.

  • वहीं वायरल संक्रमण में बुखार, शरीर दर्द, गले में ज्यादा दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं.

एलर्जी से बचने के आसान उपाय

  • घर में नमी जमा न होने दें.

  • दीवारों या बाथरूम में फंगस दिखे तो तुरंत साफ करें.

  • कमरे में हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें.

  • बिस्तर, तकिए और चादर की नियमित सफाई करें.

  • बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें.

  • धूल वाली जगह पर जाने पर मास्क का इस्तेमाल करें.

  • पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें.


कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर सांस लेने में परेशानी हो, बार-बार घरघराहट हो, एलर्जी की दवा लेने के बाद भी आराम न मिले या लक्षण कई दिनों तक बने रहें, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. डॉक्टर जरूरत पड़ने पर एलर्जी टेस्ट कर सकते हैं और सही दवा या इलाज की सलाह देते हैं.

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