एक दिन तान्या (बदला हुआ नाम) को ऑफिस में काम करते-करते पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द हुआ.. लगा शायद गैस होगी या बाहर का खाना खाने से दिक्कत हुई है. कुछ दिनों में हर वक्त थकान रहने लगी, लेकिन तान्या ने इसे भी कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया. जब परेशानी बढ़ी और डॉक्टर के पास पहुंची तो पता चला कि लिवर प्रभावित हो चुका है और वजह थी हेपेटाइटिस-बी. चौंकाने वाली बात यह थी कि बीमारी कई साल से शरीर में थी, लेकिन कोई बड़ा लक्षण नहीं दिखा. यही वजह है कि हेपेटाइटिस को 'साइलेंट डिजीज' भी कहा जाता है. भारत में लाखों लोग इस संक्रमण के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है.
वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे आज
हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है ताकि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके. इस मौके पर GNT ने यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. ध्रुव कांत मिश्रा से बात की और हेपेटाइटिस से जुड़ी हर छोटी बड़ी बात समझने की कोशिश की.
पहले समझिए, आखिर हेपेटाइटिस है क्या?
हेपेटाइटिस यानी लिवर में सूजन. यह समस्या वायरस, शराब के अधिक सेवन, कुछ दवाओं या ऑटोइम्यून बीमारियों की वजह से हो सकती है. सबसे आम वायरल हेपेटाइटिस A, B, C, D और E हैं. इनमें हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी सबसे ज्यादा परेशानी की वजह बनते हैं, क्योंकि ये कई साल तक बिना लक्षण के लिवर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
हेपेटाइटिस किसी को भी हो सकता है. इसे आम लोगों की जुबान में पीलिया कहते है. यह दूषित पानी और भोजन से होता है. शुरुआती दौर में थकान, हल्का बुखार, भूख कम लगना, मतली, उल्टी, शरीर दर्द और पेट में असहजता हो सकती है. बीमारी बढ़ने पर आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), गहरे रंग का पेशाब, सफेद मल और शरीर में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. हालांकि कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं होते.
क्या आज भी ब्लड ट्रांसफ्यूजन से हेपेटाइटिस फैलने का खतरा रहता है?
आज के समय में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए हेपेटाइटिस फैलने का खतरा पहले की तुलना में काफी कम है. खून चढ़ाने से पहले हर ब्लड यूनिट की हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी और अन्य संक्रमणों जांच की जाती है. पूरी प्रक्रिया में स्टरलाइज्ड (संक्रमण-मुक्त) उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है.
हेपेटाइटिस से जुड़ी 7 बड़ी गलतफहमियां और उनकी सच्चाई
गलतफहमी 1: हेपेटाइटिस सिर्फ शराब पीने वालों को होता है?
फैक्ट: यह सबसे आम गलतफहमी है. हेपेटाइटिस सिर्फ शराब की वजह से नहीं होता. वायरल हेपेटाइटिस अलग-अलग वायरस के कारण होता है. संक्रमित खून, संक्रमित सुई, असुरक्षित मेडिकल प्रक्रियाएं और कुछ मामलों में असुरक्षित यौन संबंध भी इसकी वजह बन सकते हैं.
गलतफहमी 2: कोई लक्षण नहीं हैं, मतलब बीमारी भी नहीं है?
फैक्ट: हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी कई साल तक बिना किसी लक्षण के शरीर में रह सकते हैं. इस दौरान वायरस लगातार लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है. इसलिए केवल स्वस्थ महसूस करना इस बात की गारंटी नहीं है कि आप संक्रमण से सुरक्षित हैं.
गलतफहमी 3: हेपेटाइटिस छूने, साथ बैठने या खाना शेयर करने से फैलता है?
फैक्ट: हेपेटाइटिस-बी और सी सामान्य संपर्क से नहीं फैलते. हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठने, एक साथ खाना खाने या बर्तन साझा करने से संक्रमण नहीं होता. यह मुख्य रूप से संक्रमित खून और शरीर के कुछ तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है.
गलतफहमी 4: ब्लड ट्रांसफ्यूजन हमेशा जोखिम भरा होता है?
फैक्ट: आज के समय में ब्लड बैंक हर यूनिट की आधुनिक तकनीक से जांच करते हैं. हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, HIV समेत कई संक्रमणों की स्क्रीनिंग के बाद ही खून चढ़ाया जाता है. इसलिए आज रक्त चढ़ाने से संक्रमण का खतरा पहले की तुलना में बहुत कम हो गया है.
गलतफहमी 5: हेपेटाइटिस से बचने का कोई तरीका नहीं है?
फैक्ट: हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है. इसके अलावा हमेशा स्टेराइल सिरिंज का इस्तेमाल, सुरक्षित रक्त, साफ मेडिकल उपकरण और सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी कम किया जा सकता है.
गलतफहमी 6: हेपेटाइटिस होने का मतलब लिवर हमेशा के लिए खराब हो जाएगा?
फैक्ट: अगर बीमारी का समय पर पता चल जाए और सही इलाज शुरू हो जाए तो लिवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. कई मरीज सामान्य जीवन जीते हैं. इसलिए जांच और इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए.
गलतफहमी 7: हेपेटाइटिस की जांच सिर्फ बीमार लोगों को करानी चाहिए?
फैक्ट: डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों को कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ हो, बड़ी सर्जरी हुई हो, डायलिसिस हुआ हो, संक्रमित सुई का संपर्क रहा हो या अन्य जोखिम वाले कारण हों, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए, चाहे उन्हें कोई लक्षण महसूस न हो.
कैसे करें बचाव?
हेपेटाइटिस-बी की वैक्सीन जरूर लगवाएं.
केवल जांचा हुआ सुरक्षित रक्त ही चढ़वाएं.
हमेशा नई और स्टेराइल सिरिंज का इस्तेमाल सुनिश्चित करें.
रेजर, टूथब्रश या सुई जैसी निजी चीजें साझा न करें.
जोखिम होने पर समय-समय पर हेपेटाइटिस की जांच कराएं.
असुरक्षित यौन संबंधों से बचें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें.
वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 28 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है?
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है. यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग की जयंती पर मनाया जाता है. उन्होंने हेपेटाइटिस-बी वायरस की खोज की और इसकी वैक्सीन विकसित करने में अहम भूमिका निभाई. इस दिन का उद्देश्य लोगों को समय पर जांच, टीकाकरण और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना है.
दुनियाभर में करोड़ों लोग संक्रमित
दुनियाभर में करीब 30 करोड़ लोग वायरल हेपेटाइटिस के साथ जीवन जी रहे हैं. हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से होने वाली जटिलताओं के कारण होती है. अच्छी बात यह है कि हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है और समय पर जांच व इलाज से गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.