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World Lung Day: लगातार खांसी और सांस फूलना हो सकता है फेफड़ों की बीमारी का संकेत, एक्सपर्ट से जानिए बचाव के आसान तरीके

फेफड़े हमारे शरीर के उन अंगों में शामिल हैं, जिनका काम बिना रुके चलता रहता है. सांस के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है.

World Lung Day
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली ,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:44 PM IST
  • कैसे रखें फेफड़ों का ख्याल
  • फेफड़ों की बीमारी के शुरुआती संकेत क्या हैं

अगर आपसे पूछा जाए कि फेफड़ों को सबसे ज्यादा नुकसान किस चीज से होता है, तो शायद आपका जवाब होगा- सिगरेट लेकिन फेफड़ों की सेहत के लिए खतरा सिर्फ धूम्रपान नहीं है. जिस हवा में हम हर दिन सांस लेते हैं, उसमें मौजूद प्रदूषण, घर में चूल्हे का धुआं, पैसिव स्मोकिंग और काम की जगह पर मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थ भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. यही वजह है कि ऐसे लोग भी फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं, जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी.

क्या है फेफड़ों का काम?
फेफड़े हमारे शरीर के उन अंगों में शामिल हैं, जिनका काम बिना रुके चलता रहता है. सांस के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है. इसलिए फेफड़ों की क्षमता प्रभावित होने पर इसका असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगता है.

World Lung Day पर GNT ने बात की यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर-पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन डॉ. विजय कुमार अग्रवाल से और फेफड़ों की सेहत से जुड़ी जरूरी बातों को समझने की कोशिश की.

फेफड़ों का काम क्या है?
जब हम सांस लेते हैं तो हवा नाक या मुंह के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचती है. फेफड़ों के अंदर मौजूद बेहद छोटी-छोटी वायु थैलियां यानी एल्वियोली ऑक्सीजन को खून में पहुंचाने में मदद करती हैं. इसके बदले खून से कार्बन डाइऑक्साइड फेफड़ों में आती है और सांस छोड़ने पर शरीर से बाहर निकल जाती है. यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है. इसलिए फेफड़ों की क्षमता कम होने पर व्यक्ति को जल्दी थकान, सांस फूलना या सामान्य काम करने में भी परेशानी महसूस हो सकती है.

फेफड़ों की बीमारी के शुरुआती संकेत क्या हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
-कई हफ्तों तक लगातार रहने वाली खांसी फेफड़ों की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है. इसके अलावा सामान्य काम करने पर सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना, सीने में दर्द या असहजता, खांसी के साथ खून आना, बार-बार सांस से जुड़े संक्रमण होना और बिना किसी स्पष्ट वजह के लगातार थकान महसूस होना भी चेतावनी के संकेत हैं. अगर सांस लेने के तरीके में बदलाव आया है या पुरानी खांसी बार-बार वापस आ रही है, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर डॉक्टर से जांच कराने से बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है और जरूरत के अनुसार इलाज शुरू किया जा सकता है.

सवाल: वायु प्रदूषण फेफड़ों को किस तरह नुकसान पहुंचाता है और इससे सबसे ज्यादा खतरा किसे है?
-प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण और दूसरे हानिकारक पदार्थ सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंचते हैं. इससे सांस की नलियों में जलन और सूजन हो सकती है. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और COPD जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोग ज्यादा संवेदनशील होते हैं. जो लोग लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में बाहर रहते हैं, उन्हें भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.

सवाल: जो लोग स्मोकिंग नहीं करते, उनके लिए पैसिव स्मोकिंग कितनी खतरनाक है?
-पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरे व्यक्ति के सिगरेट पीने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आना भी सेहत के लिए नुकसानदायक है. सेकेंड हैंड स्मोक में कई ऐसे हानिकारक रसायन होते हैं, जो धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के शरीर में जाते हैं. लगातार इसके संपर्क में रहने से सांस की नलियों में जलन, रेस्पिरेटरी इंफेक्शन और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ सकता है. लंबे समय में यह हृदय रोग और लंग कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा है. बच्चों पर इसका असर ज्यादा हो सकता है और उन्हें सांस से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए घर और बंद जगहों पर तंबाकू के धुएं से बचना जरूरी है.

फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए रोजाना कौन-सी 5 आदतें अपनानी चाहिए?

1. स्मोकिंग और पैसिव स्मोकिंग से बचें- खुद धूम्रपान न करें और घर या बंद जगह में दूसरों को भी धूम्रपान करने से रोकें.

2. रोज एक्टिव रहें- नियमित शारीरिक गतिविधि सांस लेने वाली मांसपेशियों को मजबूत रखने और फेफड़ों की कार्यक्षमता को सपोर्ट करने में मदद करती है.

3. प्रदूषण से बचाव करें- बाहर निकलने से पहले एयर क्वालिटी पर नजर रखें. प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर की गतिविधियां कम करें और जरूरी सावधानी बरतें.

4. घर में वेंटिलेशन रखें- घर में हवा का उचित आवागमन जरूरी है. खासतौर पर खाना बनाते समय धुएं को बाहर निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए.

5. संक्रमण से बचाव करें- हाथों की सफाई रखें और सांस से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें. इसके साथ संतुलित खान-पान और पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है. अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहती है या सांस लेने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें.

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