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World Physiotherapy Day: घंटों बैठने, मोबाइल देखने और घर का काम करने से क्यों होने लगा शरीर में दर्द? जानिए कब फिजियोथेरेपी जरूरी

दर्द होने पर कई लोग तुरंत पेनकिलर ले लेते हैं. इससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन हर बार इससे दर्द की असली वजह दूर नहीं होती.

physiotherapy, back pain
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

आजकल कम उम्र में ही कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों में दर्द की शिकायत आम हो गई है. ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठना, घंटों मोबाइल चलाना, गलत तरीके से बैठना और शारीरिक गतिविधि कम होना इसके बड़े कारण हैं. घर का काम करने वालों में भी लगातार झुककर काम करने या एक ही मुद्रा में लंबे समय तक रहने से शरीर में खिंचाव और अकड़न हो सकती है. कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या तुरंत दर्द की गोली ले लेते हैं. लेकिन अगर दर्द बार-बार हो रहा है, कई दिनों तक बना रहता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. 

सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर, गाजियाबाद के फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट के HOD डॉ. इंद्रमणि उपाध्याय ने बताया कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है. इससे मांसपेशियों में खिंचाव, जकड़न और दर्द की समस्या हो सकती है.

कम उम्र में ही क्यों बढ़ रहा है कमर और गर्दन का दर्द?
पहले कमर या गर्दन के दर्द को उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब युवाओं में भी यह समस्या तेजी से देखने को मिल रही है. इसका एक बड़ा कारण हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली है. ऑफिस में कई घंटे लगातार बैठना, लैपटॉप पर काम करते समय गर्दन झुकाए रखना, मोबाइल को नीचे रखकर लंबे समय तक देखना और एक्सरसाइज न करना शरीर पर असर डालता है. लगातार बैठे रहने से शरीर की कुछ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. लंबे समय में इससे गर्दन और कमर में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव और बार-बार होने वाला दर्द परेशान कर सकता है. इसके अलावा तनाव भी मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ा सकता है. यानी दर्द सिर्फ ज्यादा काम करने से नहीं, बल्कि गलत तरीके से बैठने और कम चलने-फिरने से भी हो सकता है.

घंटों बैठने के बाद दर्द होना सामान्य है या बीमारी का संकेत?
अगर कोई व्यक्ति लगातार कई घंटे बैठा रहता है तो थोड़ी देर के लिए कमर, गर्दन या पैरों में भारीपन और अकड़न महसूस होना संभव है. इसकी वजह यह है कि मांसपेशियां लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहती हैं. लेकिन हर बार दर्द को सामान्य मान लेना सही नहीं है. अगर दर्द बार-बार हो रहा है, बहुत ज्यादा है या आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा तो इसकी वजह जानना जरूरी है. ऑफिस में काम करने वाले लोग कुछ देर में अपनी सीट से उठें. लगातार एक ही जगह बैठे रहने के बजाय थोड़ी देर उठकर चलें. कुर्सी पर बैठते समय पीठ को उचित सहारा दें और मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय गर्दन को लगातार नीचे झुकाने से बचें.

सुबह उठते ही कमर, गर्दन या घुटनों में अकड़न क्यों होती है?

  • सुबह उठने पर शरीर में थोड़ी अकड़न कई कारणों से हो सकती है. लंबे समय तक एक ही स्थिति में सोना, सोने की गलत मुद्रा या मांसपेशियों में खिंचाव इसकी वजह हो सकता है.

  • ऐसे में उठते ही अचानक तेज एक्सरसाइज या झटके वाली गतिविधि करने से बचें. पहले धीरे-धीरे शरीर को हिलाएं और हल्की स्ट्रेचिंग करें. सोने की मुद्रा और गद्दे के आराम को भी ध्यान में रखना चाहिए.

  • अगर सुबह की अकड़न बहुत ज्यादा है, लगातार बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ रही है या इसके साथ सूजन और कमजोरी भी महसूस हो रही है तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.

क्या सिर्फ स्ट्रेचिंग से दर्द से बचा जा सकता है?

  • कई सामान्य दर्द और अकड़न से बचने में नियमित स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज मदद कर सकती है. इससे शरीर का लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों की मूवमेंट बेहतर रहती है.

  • खासकर उन लोगों के लिए यह जरूरी है जो दिन का बड़ा हिस्सा कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं. हर कुछ देर में उठना, थोड़ा चलना और शरीर की स्थिति बदलना मांसपेशियों पर पड़ने वाले लगातार दबाव को कम कर सकता है.

  • हालांकि एक्सरसाइज का तरीका सही होना भी जरूरी है. गलत तरीके से स्ट्रेचिंग या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने से उल्टा चोट लग सकती है. इसलिए अगर पहले से दर्द है तो अपनी तरफ से कोई कठिन एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.

कौन सा दर्द फिजियोथेरेपी से ठीक या कम हो सकता है?
फिजियोथेरेपी खासतौर पर मांसपेशियों, जोड़ों की मूवमेंट, कमजोरी, गलत पॉश्चर और शरीर की गतिविधियों से जुड़ी कई समस्याओं में उपयोगी हो सकती है. कमर और गर्दन में होने वाला दर्द, मांसपेशियों का खिंचाव, लंबे समय तक बैठने से होने वाली अकड़न और ऐसी समस्याएं जिनमें शरीर की मूवमेंट प्रभावित हो रही हो, उनमें फिजियोथेरेपी की मदद ली जा सकती है. फिजियोथेरेपिस्ट सिर्फ दर्द वाली जगह पर ध्यान नहीं देता, बल्कि यह भी देखता है कि दर्द क्यों हो रहा है. पॉश्चर, शरीर की मूवमेंट, मांसपेशियों की ताकत और कमजोरी को देखकर जरूरत के मुताबिक एक्सरसाइज और रिहैबिलिटेशन प्लान तैयार किया जा सकता है.

दर्द की गोली कब तक लेते रहना ठीक नहीं?
दर्द होने पर कई लोग तुरंत पेनकिलर ले लेते हैं. इससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन हर बार इससे दर्द की असली वजह दूर नहीं होती.

अगर दर्द कुछ दिनों से बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है, रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है या आराम के बावजूद मूवमेंट प्रभावित हो रही है तो सिर्फ दर्द की गोली लेकर उसे दबाते रहना सही तरीका नहीं है.

ऐसी स्थिति में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेकर दर्द का कारण समझना जरूरी है. कई बार सही एक्सरसाइज, पॉश्चर में सुधार और मांसपेशियों को मजबूत करने से समस्या को लंबे समय तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.

घर और ऑफिस में ये 5 आदतें अपनाएं

1. एक ही जगह लगातार न बैठें- कुछ समय के अंतराल पर उठकर थोड़ा चलें.

2. मोबाइल नीचे रखकर न देखें- स्क्रीन को आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखें ताकि गर्दन ज्यादा न झुके.

3. बैठने का तरीका सुधारें- पीठ को सहारा दें और लंबे समय तक झुककर न बैठें.

4. रोज थोड़ा चलें-फिरें- शरीर को सक्रिय रखना मांसपेशियों और जोड़ों के लिए जरूरी है.

5. दर्द को बार-बार नजरअंदाज न करें- दर्द लगातार हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित करे तो विशेषज्ञ से सलाह लें.

 

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