World Sleep Day: अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान आदतें, इन 5 गलतियों से बिगड़ सकता है स्लीप साइकिल

आमतौर पर यह छोटे-छोटे जागरण हमें याद भी नहीं रहते. लेकिन अगर इस समय शरीर या दिमाग किसी वजह से प्रभावित हो जाए तो व्यक्ति पूरी तरह जाग सकता है. बार-बार जागना अक्सर इसी प्राकृतिक नींद संरचना में रुकावट का संकेत होता है.

World Sleep Day 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:52 PM IST

आज वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जा रहा है. स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए रोजाना 7-8 घंटे की नींद बेहद जरूरी मानी जाती है. कई लोग नींद को कम महत्व देते हैं, लेकिन वे नहीं जानते हैं लंबे समय तक पूरी नींद नहीं होने से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं. देर रात तक काम, सफर, तनाव और मोबाइल की आदत से अच्छी नींद लेना मुश्किल हो जाता है. 

कई लोगों की नींद रात में अक्सर खुल जाती है, ऐसा क्यों होता है?
रात में कभी-कभी जागना सामान्य है, लेकिन अगर यह बार-बार हो और दोबारा सोना मुश्किल हो जाए तो इसके पीछे वजह हो सकती है. नींद के पैटर्न, स्ट्रेस, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और जीवनशैली की आदतें मिलकर नींद को प्रभावित कर सकती हैं. नींद लगभग 90 मिनट के चक्र में चलती है. इसमें नॉन-रैपिड आई मूवमेंट (NREM) और रैपिड आई मूवमेंट (REM) के चरण शामिल होते हैं. इन चरणों के बीच बदलाव के दौरान दिमाग थोड़ी देर के लिए ज्यादा सतर्क हो जाता है.

आमतौर पर यह छोटे-छोटे जागरण हमें याद भी नहीं रहते. लेकिन अगर इस समय शरीर या दिमाग किसी वजह से प्रभावित हो जाए तो व्यक्ति पूरी तरह जाग सकता है. बार-बार जागना अक्सर इसी प्राकृतिक नींद संरचना में रुकावट का संकेत होता है.

अच्छी नींद के लिए कौन-सी आदतें मदद कर सकती हैं?

  • रोज एक ही समय पर सोना और एक ही समय पर उठना.

  • सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का इस्तेमाल बंद करना.

  • सोने से पहले शांत माहौल बनाना भी जरूरी.

  • इसके अलावा, कमरे को शांत, ठंडा और हल्की रोशनी वाला रखना भी बेहतर नींद में मदद करता है.

6 घंटे से कम सोने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
अगर कोई व्यक्ति रोजाना 6 घंटे से कम सोता है, तो शरीर को मरम्मत का समय नहीं मिल पाता. इससे लगातार थकान, ध्यान लगाने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है.

लंबे समय तक नींद की कमी रहने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो सकती है, जिससे व्यक्ति जल्दी बीमार पड़ सकता है. इसके अलावा, दिल की बीमारियों, वजन बढ़ने और मानसिक तनाव का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए पर्याप्त नींद लेना शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है.

स्लीपिंग पैटर्न को प्रभावित करने वाली 5 आम गलतियां

  • बिस्तर पर मोबाइल चलाना या टीवी देखना.

  • शाम या रात में ज्यादा कैफीन लेना.

  • हर दिन अलग-अलग समय पर सोना और उठना.

  • सोने से ठीक पहले भारी भोजन करना.

  • बिस्तर पर बैठकर काम करना या पढ़ाई करना.

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