मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पुरातत्व की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है. जिले की सलेहा तहसील के प्रसिद्ध ऐतिहासिक गांव नचना में भारतीय पुरातत्व विभाग की खुदाई के दौरान श्रृंगार करती एक नायिका की प्राचीन प्रतिमा मिली है. करीब 1500 साल पुरानी बताई जा रही यह प्रतिमा गुप्तकालीन भारतीय कला, संस्कृति और उस दौर की महिलाओं की सौंदर्य परंपराओं को समझने का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जा रही है.
करीब 20 सेंटीमीटर ऊंची यह प्रतिमा धूसर बलुआ पत्थर से बनी है. इसकी सतह पर चमकदार पॉलिश दिखाई देती है. प्रतिमा में एक महिला को श्रृंगार करते हुए दिखाया गया है. खास बात यह है कि इसमें महिलाओं के केश विन्यास से लेकर आभूषणों तक का बेहद बारीकी से चित्रण किया गया है. महिला के बालों में क्लिप जैसी सजावटी वस्तु, गले में सात लड़ियों वाला हार, हाथों में कंगन और बाजुओं में बाजूबंद नजर आ रहे हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब डेढ़ हजार साल पहले भी महिलाओं के श्रृंगार और आभूषणों की परंपरा कितनी विकसित थी.
गुप्तकालीन कला का दुर्लभ प्रमाण
पुरातत्वविद और एएसआई अधीक्षक शिवकांत बाजपेयी के अनुसार, यह प्रतिमा काफी प्राचीन है और लगभग 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही है. चौथी-पांचवीं शताब्दी की यह कलाकृति उस दौर की शिल्पकला और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है. पत्थर पर इतने बारीक तरीके से श्रृंगार, आभूषण और केश सज्जा को उकेरना उस समय के शिल्पकारों की असाधारण दक्षता का परिचायक है.
यह प्रतिमा इसलिए भी खास है, क्योंकि गुप्तकालीन कला में श्रृंगार करती नायिका का ऐसा स्वरूप दुर्लभ माना जाता है. भारतीय कला इतिहास में ग्यारसपुर की 'लेडी ऑफ ग्यारसपुर' और खजुराहो संग्रहालय में संरक्षित 'सुखनायिका' जैसी प्रतिमाएं भी उल्लेखनीय हैं. हालांकि, पन्ना के नचना से मिली यह प्रतिमा इन दोनों से कहीं अधिक प्राचीन काल की बताई जा रही है. ऐसे में यह खोज भारतीय मूर्तिकला के विकासक्रम को समझने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है.
नचना की ऐतिहासिक विरासत को मिली नई पहचान
पन्ना जिले का नचना गांव गुप्तकालीन मंदिर स्थापत्य के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है. यहां स्थित पार्वती मंदिर और चौमुखनाथ मंदिर ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से खास महत्व रखते हैं. अब श्रृंगार करती नायिका की प्रतिमा मिलने से नचना की पुरातात्विक पहचान और समृद्ध हुई है. यह खोज केवल एक प्राचीन मूर्ति मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उस दौर की जीवनशैली, महिलाओं की सज्जा, सौंदर्यबोध और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर भी मिलता है. प्रतिमा में उकेरे गए आभूषण और केश विन्यास गुप्तकाल के सौंदर्यबोध और कला के गहरे संबंध की झलक देते हैं.
संग्रहालय में संरक्षित होगी अनमोल धरोहर
इस ऐतिहासिक प्रतिमा को आने वाले समय में संग्रहालय में प्रदर्शित और संरक्षित किए जाने की योजना है, ताकि आम लोग भी गुप्तकालीन कला के इस अद्भुत स्वरूप को देख सकें. पुरातत्वविदों और इतिहास प्रेमियों के लिए यह प्रतिमा खास आकर्षण का केंद्र बन सकती है. पन्ना के नचना में मिली यह नायिका प्रतिमा भारतीय इतिहास के उस दौर की याद दिलाती है, जब पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियां केवल सजावट का माध्यम नहीं थीं, बल्कि तत्कालीन समाज, संस्कृति और जीवनशैली का जीवंत दस्तावेज भी हुआ करती थीं. करीब 1500 साल बाद भी इस प्रतिमा में सुरक्षित श्रृंगार का स्वरूप प्राचीन भारत के कला-कौशल और सांस्कृतिक समृद्धि की कहानी बयां कर रहा है.
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