गुजरात के सूरत में लोगों की जान से खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है. यहां पांडेसरा के औद्योगिक इलाके में 16 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं. ये सभी बिना मेडिकल डिग्री और जरूरी रजिस्ट्रेशन के मरीजों का इलाज कर रहे थे. कोई 10वीं पास था तो कोई 12वीं, बीए या बीएससी तक पढ़ा था. इसके बावजूद ये लोगों को एलोपैथिक दवाएं दे रहे थे और इंजेक्शन लगा रहे थे. कार्रवाई SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने की.
डमी मरीज भेजकर की गई जांच
पुलिस को सूचना मिली थी कि पांडेसरा इलाके में कुछ लोग बिना डिग्री के डॉक्टर बनकर क्लिनिक चला रहे हैं. ये सुबह 8 से 11 बजे तक मरीजों का इलाज करते थे. सूचना की पुष्टि के लिए SOG की टीम ने संदिग्ध क्लिनिकों में डमी मरीज भेजे. जांच में शिकायत सही मिलने के बाद मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल बी. पटेल के साथ मिलकर टीम बनाई गई. इसके बाद एक साथ 16 क्लिनिकों पर छापेमारी की गई.
मजदूरों की बीमारी का फायदा उठा रहे थे
पांडेसरा में बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के मजदूर रहते हैं. इनमें से कई लोग बुखार, मलेरिया और दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए इन क्लिनिकों में जाते थे. पकड़े गए कई लोग पहले अपने गृह राज्य में किसी डॉक्टर या अस्पताल के यहां कंपाउंडर और हेल्पर का काम कर चुके थे. सूरत आने के बाद उन्होंने अपना क्लिनिक खोल लिया और डॉक्टर की तरह मरीजों का इलाज करने लगे.
ये लोग मरीजों को एंटीबायोटिक्स, दर्द की दवाएं और दूसरी एलोपैथिक दवाएं देते थे. कुछ जगहों पर मरीजों को ग्लूकोज की बोतलें भी चढ़ाई जा रही थीं. बिना सही मेडिकल जानकारी के इस तरह इलाज करना मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है.
कोई 24 तो कोई 33 साल से चला रहा था क्लिनिक
पकड़े गए 16 लोगों में से तीन पहले भी इसी तरह के मामले में पकड़े जा चुके हैं. साईं धाम क्लिनिक चलाने वाला 54 वर्षीय सियाराम मौर्य 24 साल से इलाज कर रहा था. उसे 2002 में भी पकड़ा गया था. चानसी क्लिनिक चलाने वाला 58 वर्षीय विनोद विश्वास 12वीं पास है और करीब 30 साल से प्रैक्टिस कर रहा था. वह 2008 में पकड़ा गया था. नीर क्लिनिक का 31 वर्षीय सद्दाम बनखान भी पहले SOG के हाथों पकड़ा जा चुका है.
वहीं, फ्री सेवा सदन चलाने वाला 58 वर्षीय कपिलकुमार अर्जुनप्रसाद वर्मा केवल 10वीं पास है. वह पिछले 33 साल से अलग-अलग जगहों पर क्लिनिक चला रहा था. कार्रवाई में महेंद्रसिंह यादव, परितोष रॉय, आलोक सिंह, अजीत कुमार सिंह, जितेंद्र वर्मा, गौतम प्रसाद, पलाश भक्ता, महेश्वर विश्वास, सत्येंद्र यादव, सुरेंद्र प्रसाद मेहता, सुनीति कुमार विश्वास और संजीत कुमार सिंह भी पकड़े गए.
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