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देश ने मनाया 80वां स्वतंत्रा दिवस, तो इन 92 गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा... खौफ की जगह ली जश्न ने

छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जिले के उन 92 गांवों के लिए यह दिन बेहद खास है. यहां अबतक नक्सलवाद का खतरा रहता था, जिसके चलते तिरंगा नहीं फहर पाता था, लेकिन इस बार इस राष्ट्रीय पर्व पर जहां जश्न की लहर देखने को मिली.

तिरंगा थामे बच्चे
धर्मेन्द्र महापात्र
  • बस्तर,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जिले के उन 92 गांवों के लिए यह दिन बेहद खास है, जहां कभी नक्सलवाद का खौफ राष्ट्रीय पर्व की खुशियों पर भारी पड़ता था. इस बार इन गांवों में आजादी का जश्न डर के साये में नहीं, बल्कि तिरंगे की शान के साथ मनाया जा रहा है. कभी जिन इलाकों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर नक्सली बंद का असर दिखाई देता था, वहां अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. ग्रामीण खुले तौर पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए आगे आ रहे हैं.

नक्सल प्रभाव से बाहर आने के बाद बदली तस्वीर

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और प्रशासन की बढ़ती पहुंच के बाद सुकमा,  बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर के कई अंदरूनी इलाकों में बदलाव दिखाई देने लगा है. 31 मार्च के बाद नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है. इसके साथ ही सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों की पहुंच भी गांवों तक बढ़ी है.इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक आज गांवों में लहराता तिरंगा नजर आ रहा है.

काले झंडे के दौर से तिरंगे की शान तक

बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में एक दौर ऐसा भी रहा, जब राष्ट्रीय पर्व के दौरान ग्रामीणों के सामने कई तरह की बंदिशें और भय का माहौल रहता था. तिरंगा फहराना भी कई जगह चुनौती माना जाता था. आज वही तस्वीर बदलती नजर आ रही है. जिन गांवों में कभी बंदूक और डर का साया था, वहां अब बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर आजादी का पर्व मना रहे हैं.

बच्चों के चेहरों पर दिखी नई आजादी

स्वतंत्रता दिवस को लेकर गांवों में बच्चों और युवाओं में खास उत्साह है. स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने की तैयारियां की गईं थीं. राष्ट्रगान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति के माहौल के बीच ग्रामीणों ने आजादी का पर्व मनाया. यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कभी इन्हीं इलाकों में राष्ट्रीय पर्व मनाना प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के लिए बड़ी चुनौती हुआ करता था.

तिरंगा बना बदलाव की पहचान

बस्तर के इन 92 गांवों की तस्वीर बस्तर में बदलते हालात की एक झलक पेश करती है. सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं और प्रशासन की पहुंच बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में भरोसा मजबूत हो रहा है. जहां कभी खौफ था, वहां अब तिरंगा है. जहां कभी बंद का साया था, वहां आज राष्ट्रगान की गूंज सुनाई दे रही है.यह सिर्फ 15 अगस्त का जश्न नहीं, बल्कि उन गांवों के लिए एक नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है.

 

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