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Digital Arrest: 78 साल के बुजुर्ग की गाढ़ी कमाई पर किया हाथ साफ, 15 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट.. बोले, 'अगर मुंह खोला तो होगे गिरफ्तार'

नोएडा के बुजुर्ग को साइबर ठगों ने करीब 15 दिन अपना शिकार बनाए रखा. इस दौरान वह TRAI, न्यायाधीश और पुलिस के रूप में उनके सामने आए. साथ ही उन्हें कहां कि इस बारे में किसी से भी बात ना करें तो उनके लिए अच्छा होगा.

gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 21 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

नोएडा के एक 78 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को साइबर अपराधियों ने 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया. इस दौरान उससे 3.14 करोड़ रुपए की ठगी की गई. इस चौंकाने वाली घटना में ठगों ने खुद को TRAI, पुलिस, CBI और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी बताया. जिसके कारण बुजुर्ग मानसिक दबाव में आया और ठगों ने सारी जमा पूंजी ठग ली.

कैसे लिया झांसे में
जानकारी के मुताबिक नोए़डा सेक्टर-75 में रहने वाले बुजुर्ग के पास 25 फरवरी 2025 को एक कॉल आई. जिसमें कॉलर ने खुद को TRAI अधिकारी बताया. कॉलर ने एक पुराने मोबाइल नंबर की पुष्टि करनी चाही, जिसे बुजुर्ग भूल चुके थे. कुछ ही देर बाद बताया गया कि मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और निवेश धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायत दर्ज है.

फर्जी अधिकारी और न्यायाधीश
इसके बाद कोलाबा पुलिस स्टेशन के एक कथित अधिकारी विजय खन्ना और एक सीबीआई अधिकारी राहुल गुप्ता ने संपर्क किया. उन्होंने बुजुर्ग को बताया कि उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष ऑनलाइन पेश किया जाएगा. ठगों ने बुजुर्ग को भरोसा दिलाया कि यह मामला नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है और उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया जाएगा.

'मुंह खोला तो करेंग गिरफ्तार'
जब बुजुर्ग ने बताया कि वे 78 साल के हैं और उनकी पत्नी 71 साल की हैं, तब ठगों ने उन्हें ऑनलाइन जांच में सहयोग करने का दबाव बनाया. उन्होंने बुजुर्ग को बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के चलते उन्हें किसी से बात नहीं करनी चाहिए. यहां तक कि कहा गया कि अगर उन्होंने जानकारी साझा की, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

बुजुर्ग इतने डर गए कि उन्होंने अपनी सारी जीवनभर की कमाई 3.14 करोड़ रुपए ठगों को सौंप दिए. यह सोचकर कि यह सिर्फ मौद्रिक सत्यापन है और पैसे वापस मिल जाएंगे. बुजुर्ग को 3 मार्च 2025 को एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी भेजा गया, जिसमें कहा गया था कि उनके फंड वैध हैं और 6-7 दिनों में वापस कर दिए जाएंगे. लेकिन, जब पैसे वापस नहीं मिले, तब उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर ठगी के शिकार हो गए हैं.

आधा महीना रहे डिजिटल अरेस्ट
यह पूरा घटनाक्रम 26 फरवरी से 12 मार्च तक के बीच हुआ इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डिजिटल अरेस्ट कर के बुजुर्ग दंपति को रखा गया. 15 दिनों तक साइबर ठगों ने केवल खाने और दैनिक कार्यों की ही अनुमति दी. पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करवाई है, अब मामले की जांच थाना सेक्टर 36 साइबर क्राइम पुलिस कर रही है.

-भूपेंद्र चौधरी की रिपोर्ट

 

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