बिहार में नए चीनी मिल खोलने की तैयारी के साथ ही गन्ने की खेती बढ़ाने पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है. सरकार चाहती है कि आने वाले समय में चीनी मिलों को गन्ने की कमी का सामना न करना पड़े. इसी दिशा में Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University, पूसा के ईख अनुसंधान केंद्र में गन्ने की नई किस्मों और आधुनिक तकनीकों पर शोध शुरू कर दिया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि AI की मदद से गन्ने की खेती करने पर किसानों की उपज में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है.
AI बताएगा खेती का सही तरीका
अब गन्ना किसानों को खेती के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा मिलेगा. AI आधारित तकनीक के जरिए किसानों को मिट्टी की स्थिति, सिंचाई का सही समय, खाद की मात्रा और रोग नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी. इससे किसानों को सही समय पर सही फैसले लेने में मदद मिलेगी और पैदावार भी बढ़ेगी.अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती करते हैं तो लागत कम होगी और उत्पादन ज्यादा मिलेगा.
नई चीनी मिलों के लिए बढ़ेगा गन्ने का उत्पादन
हाल ही में नीतीश कुमार सरकार ने राज्य में पुरानी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और नई मिलें खोलने की घोषणा की है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक कमेटी का गठन भी किया है, ताकि गन्ने की उपलब्धता और खेती को बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा सके.
देश के बड़े शुगर संस्थानों के वैज्ञानिकों की बैठक
इस विषय पर हाल ही में पटना में एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें देश के कई प्रमुख शुगर रिसर्च संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हुए. इसमें Vasantdada Sugar Institute, Sugarcane Breeding Institute कोयंबटूर और Indian Institute of Sugarcane Research लखनऊ के विशेषज्ञों ने भाग लिया.
तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने बताया कि AI और आधुनिक तकनीक अपनाने से गन्ने की खेती ज्यादा लाभदायक बन सकती है और किसानों की आय भी बढ़ेगी.
किसानों को प्रशिक्षण के जरिए दी जाएगी जानकारी
P. S. Pandey, कुलपति, Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University ने बताया कि विश्वविद्यालय किसानों को नई तकनीक की जानकारी देने के लिए किसान मेला और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है.
किसान मेले में मशरूम उत्पादन, उद्यानिकी और सब्जी-फल की बेहतर खेती को लेकर भी विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इससे किसानों को खेती के नए विकल्पों के बारे में जानकारी मिलेगी.
500 गांवों में शुरू हुआ कृषि विकास कार्यक्रम
कुलपति ने बताया कि राज्य सरकार के कृषि रोडमैप के तहत विश्वविद्यालय को करीब 500 गांवों में कृषि विकास कार्यक्रम चलाने की जिम्मेदारी दी गई है. इन गांवों में आधुनिक खेती, नई फसल किस्में और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल तकनीकों पर काम किया जा रहा है.