हिंदुत्व पर सवार बीजेपी की हनक और बंगाल में ममता बनर्जी के हश्र ने अखिलेश यादव को 20270 चुनाव के लिए अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. कभी मुस्लिम परस्त राजनीति का टैग झेल रहे हैं अखिलेश यादव अब सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ चले हैं ताकि उनके ऊपर मुस्लिम परस्त राजनीति का कोई मुलम्मा ना चिपक जाए.
अखिलेश यादव ने रामचरितमानस को सांस्कृतिक की संज्ञा दी
लखनऊ में एक वकील को लाठी से पीटती पुलिस पुलिस की तस्वीर ने अखिलेश यादव को रामचरितमानस के बहाने बीजेपी को खेलने का मौका दे दिया. वकील की तस्वीर के साथ अखिलेश यादव ने जो बातें लिखी हैं वह उनके बदलते सियासी रणनीति को दर्शाता है. पहली बार अखिलेश यादव ने रामचरितमानस को सांस्कृतिक की संज्ञा दी है. पहले अखिलेश यादव का यह ट्वीट देखिए उन्होंने लिखा क्या है....
अपने ट्वीट में अखिलेश ने क्या लिखा
भाजपा प्रभु राम का नाम अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्धी के लिए करती रही है. कल जिस प्रकार भाजपा सरकार ने हाथ में श्रीरामचरितमानस लिए हुए अधिवक्ता पर अति निंदनीय हिंसक लाठीचार्ज किया वो भाजपा की सनातन विरोधी सोच को दर्शाता है. इससे सांस्कृतिक-संविधान रूपी हमारे इस महाकाव्य और महा-मर्यादा ग्रंथ का महा-अपमान हुआ है.
इस लाठीचार्ज में घायल हुए एवं धार्मिक रूप से मर्माहत हुए अधिवक्ता महोदय को हमारे जन-प्रतिनिधियों ने ‘श्रीरामचरितमानस’ की एक नई प्रति देकर उनका कुशलक्षेम पूछा और निर्मम-निर्दयी ‘अधर्मी भाजपा राज’ के विरुध्द सदैव साथ देने के आश्वासन के साथ ही सहयोग व समर्थन देने की बात कही. ऐसे सहृदय और स्वतः सक्रिय कार्यकर्ता ही हमारी शक्ति हैं, इस भेंट में सम्मिलित हर एक कार्यकर्ता को इस सकारात्मक मानवीय शिष्टाचार व ‘धर्म का सम्मान’ करनेवाले सद्कर्म के लिए हार्दिक बधाई और धन्यवाद!
भाजपा से संबद्ध सभी सच्चे धर्म प्रेमी लोगों और समस्त संत समाज से हम ये अपील करते हैं कि वो भाजपा के धार्मिक पाखंड का भंडाफोड़ करने के लिए आगे आएं और ‘अधर्मी भाजपा’ का मुखौटा उतार दें. अब धर्म-हित और देश-हित में वो समय आ गया है कि ये सच सबके सामने आना ही चाहिए कि भाजपाई अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म का आवरण धारण करके समाज में विभेद उत्पन्न करते हैं और साम्प्रदायिकता फैलाते हैं. इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है और अशांति आती है. अशांत समाज कभी विकसित नहीं हो सकता है. इसीलिए ये भाजपाइयों का देश-विरोधी कृत्य है. इसके कारण समाज में आपसी मनमुटाव पैदा होता है और विभाजन भी. ये भाजपाई लोग धर्म के बहाने परस्पर अविश्वास और भय को जन्म देकर अपना उल्लू सीधा करते हैं. इसीलिए आइए, देश को अंदर से खोखला करनेवाले इन ‘अधर्मी भाजपाइयों और उनके अदृश्य भूमिगत संगी-साथियों’ का काला चिट्ठा, हम सब मिलकर खोल दें.
भाजपा हटाएं, धर्म बचाएं-देश बचाएं!
धर्म कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
रामचरितमानस के बहाने ही सही अखिलेश यादव ने बीजेपी और योगी सरकार को घेरा है.
समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण चेहरा पूजा शुक्ला जिन्होंने उस घायल वकील को अस्पताल में जाकर रामचरितमानस की प्रति भेंट की उन्होंने कहा कि यह सनातन का घोर अपमान है और जिस तरीके से हमारे इस महाग्रंथ का अपमान किया गया है हम इसे नहीं सहेंगे.
अपनी हिंदू की छवि सार्वजनिक कर रहे हैं अखिलेश
अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से लगातार अपनी हिंदू की छवि सार्वजनिक कर रहे हैं. सैफई में खुद बनवा रहे केदारेश्वर मंदिर की फोटो तस्वीर शेयर करते रहते हैं उसके बारे में बताते रहते हैं भगवान शिव की पूजा करते परिवार के साथ उनकी तस्वीर कई बार सामने आती है.
अभी हाल ही में अखिलेश यादव ने खुद को ज्योतिषों के शरणागत बताया और कहा कि वह हर काम अब ज्योतिष के हिसाब से ही करते हैं. ज्योतिष कहते हैं तो कपड़े और टोपी पहनते हैं ज्योतिष कहते हैं तो बाहर निकलते हैं मना कर देते हैं तो नहीं निकलते हैं. सिर्फ सॉफ्ट हिंदुत्व नहीं बल्कि ब्राह्मणों को लेकर भी अखिलेश यादव अब थोड़े ज्यादा सतर्क हो गए हैं हाल ही में सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने एक कार्यक्रम में ब्राह्मणों की तुलना वेश्याओं से कर दी, इसके बाद समाजवादी पार्टी के भीतर भूचाल आ गया एक दिन पहले राजकुमार भाटी को लखनऊ तलब किया गया और बताया जाता है कि बंद कमरे में अखिलेश यादव ने उन्हें कायदे से समझा दिया.
हालांकि बीजेपी इसे अखिलेश यादव का दिखावटी की चेहरा करार देती है और और अखिलेश को सनातन और ब्राह्मण विरोधी कहती है. अखिलेश यादव की यह भरसक कोशिश है कि उनकी छवि हिंदू विरोधी या हिंदुत्व के दुश्मन जैसी ना बने वह अपने चेहरे को समावेशी सियासी चेहरे के तौर पर पेश कर सके, अखिलेश यादव चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी जिस तरह अल्पसंख्यकों की पार्टी के तौर पर पेश की जाती रही है उसे इतर एक समावेशी पार्टी के तौर पर उनकी और समाजवादी पार्टी दोनों की नई पहचान बने.
ये भी पढ़ें: