सूफी संत और महान कवि मलिक मोहम्मद जायसी की साहित्यिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अमेठी जिले में स्थित मलिक मोहम्मद जायसी स्मारक एवं पार्क को सूफी-कबीर सर्किट के तहत आधुनिक पर्यटन और साहित्यिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से 10.36 करोड़ रुपये की व्यापक पर्यटन विकास परियोजना पर काम चल रहा है. परियोजना के लिए अब तक 9.15 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. संबंधित अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना का काम अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा.
साहित्य और पर्यटन को जोड़ने की कोशिश
इस परियोजना का उद्देश्य केवल स्मारक का सौंदर्यीकरण करना नहीं है, बल्कि मलिक मोहम्मद जायसी के जीवन और साहित्यिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है. अमेठी में जन्मे जायसी उत्तर प्रदेश की साहित्यिक और सूफी परंपरा के प्रमुख कवियों में शामिल हैं. उनके जन्मस्थल पर स्थित शोध संस्थान और स्मारक को विकसित कर यहां आने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार की जा रही हैं. परियोजना के जरिए जायसी की साहित्यिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने के साथ-साथ सूफी-कबीर सर्किट को भी मजबूती देने की तैयारी है.
सरकार ने बताई परियोजना की अहमियत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उन महान संतों और कवियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया. उन्होंने बताया कि मलिक मोहम्मद जायसी परियोजना महान सूफी कवि की अमर साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के साथ सूफी-कबीर सर्किट को मजबूत करेगी. इसके जरिए युवा पीढ़ी को समृद्ध साहित्यिक परंपराओं से जोड़ने का काम भी किया जाएगा. पर्यटन मंत्री के मुताबिक, यह परियोजना साहित्यिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है.
अमृत उद्यान की तर्ज पर तैयार हो रहा पार्क
परियोजना के तहत मलिक मोहम्मद जायसी पार्क को अमृत उद्यान की तर्ज पर आकर्षक और व्यवस्थित स्वरूप दिया जा रहा है. पार्क को लैंडस्केप सममित डिजाइन के साथ विकसित किया जा रहा है. वहीं, मौजूदा शोध संस्थान को आधुनिक लाइब्रेरी में बदला जा रहा है. यह लाइब्रेरी विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए जायसी के जीवन और साहित्यिक कृतियों को समझने का प्रमुख केंद्र बनेगी.
120 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम
परिसर में करीब 120 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम भी तैयार किया जा रहा है. यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार और लाइट एंड साउंड शो आयोजित किए जा सकेंगे. इसके साथ ही आगंतुकों की सुविधाओं और मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया है. परिसर में दो सामुदायिक पार्क, ओपन जिम, वॉकिंग एवं मेडिटेशन जोन और एक्यूप्रेशर शैली के कंकड़ वाले मार्ग विकसित किए जा रहे हैं. इसके अलावा पार्किंग, बड़े प्रवेश द्वार और बच्चों के लिए प्ले एरिया भी तैयार किया जा रहा है.
भित्तिचित्रों में दिखेगा जायसी का साहित्यिक सफर
स्मारक का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है. इसकी दीवारों पर मलिक मोहम्मद जायसी के जीवन, साहित्यिक यात्रा और उनकी कालजयी रचनाओं को दर्शाने वाले कलात्मक भित्तिचित्र तैयार किए गए हैं. इससे यहां आने वाले लोगों को केवल स्मारक देखने का अनुभव नहीं मिलेगा, बल्कि वे जायसी के जीवन और साहित्यिक योगदान को भी करीब से समझ सकेंगे.
'पद्मावत' से जुड़ी है जायसी की पहचान
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि मलिक मोहम्मद जायसी महान सूफी संत और कवि थे. उनकी 16वीं शताब्दी की कालजयी कृति 'पद्मावत' भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं में शामिल है. उन्होंने बताया कि इतने महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान के बावजूद पिछले कई दशकों में उनकी विरासत की अपेक्षित देखभाल नहीं हुई. मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान कभी ऐसी स्थिति तक पहुंच गया था कि उसका इस्तेमाल अस्तबल के रूप में होने लगा था.
अब योगी सरकार के प्रयासों से इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह परियोजना उपेक्षित विरासत स्थलों को उनका सम्मान और पहचान दिलाने के साथ साहित्य, संस्कृति और पर्यटन को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.
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