उत्तर प्रदेश विधान परिषद की हाई-प्रोफाइल लखनऊ खंड स्नातक सीट के नतीजों ने सियासी गलियारों में बड़ी हलचल मचा दी है. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी को झटका लगा है. समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने बीजेपी के अवनीश पटेल को शिकस्त देकर यह सीट अपने नाम कर ली है. लेकिन इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा एक निर्दलीय उम्मीदवार की हार की हो रही है.
जाने-माने ज्योतिषाचार्य की पत्नी चुनाव हारी
देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा भी इस चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही थीं, जिन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है. चौंकाने वाली बात यह है कि चुनाव में एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बावजूद स्मिता मिश्रा को 300 वोट भी नसीब नहीं हो सके. उन्होंने इस चुनाव के लिए पिछले 2 सालों से जमीन पर तैयारी की थी. 37 तहसीलों के स्कूल-कॉलेजों में जाकर शिक्षकों, छात्रों और स्नातकों के बीच जमकर जनसंपर्क किया. अखबारों में पूरे-पूरे पन्ने के बड़े विज्ञापन दिए गए. यही नहीं, चुनाव अभियान के दौरान उन्हें करणी सेना, स्थानीय ब्रह्म समाज और नवयुवक दल जैसे कई सामाजिक संगठनों का खुला समर्थन भी हासिल था, लेकिन यह तमाम कोशिशें वोटों में तब्दील नहीं हो सकीं.
पत्नी को नहीं जिता पाए चुनाव
पत्नी की इस करारी हार के बाद अब आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा सोशल मीडिया पर यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं. लोग उन्हें ट्रोल करते हुए सवाल पूछ रहे हैं कि जो शख्स टीवी पर बैठकर पूरी दुनिया को संकट से बचने के उपाय और कामयाबी के टोटके बताता है, उसने अपनी पत्नी को चुनाव जीतने का कोई अचूक उपाय क्यों नहीं बताया? सोशल मीडिया पर चल रहे इन तंज और सवालों के बीच खुद स्मिता मिश्रा ने सामने आकर सफाई दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने अपने पति से अपनी कुंडली या चुनावी भविष्य को लेकर कोई सवाल नहीं पूछा था. स्मिता ने कहा कि उनके घर पर तमाम राजनीतिक दलों के बड़े नेता आते हैं और आचार्य जी के बताए उपायों से सफलता भी पाते हैं. लेकिन वह खुद सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा और परोपकार के भाव से चुनावी मैदान में उतरी थीं.
अपनी हार का ठीकरा चुनावी व्यवस्था और धांधली पर फोड़ते हुए स्मिता मिश्रा ने गंभीर आरोप भी लगाए हैं. उनका दावा है कि दो साल की मेहनत के बाद उन्होंने जो वोटर तैयार किए थे, उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े ही नहीं गए. इसके अलावा उन्होंने पोलिंग बूथों पर अपने चुनावी एजेंटों को न बैठने देने और चुनाव में जमकर धनबल के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है.
26 मेडल पाने वाले पुलिस अफसर की बेटी हैं स्मिता
पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो स्मिता मिश्रा का मायका उन्नाव जिले के कुरारी गांव में है, जबकि ससुराल बाराबंकी के इकरा गांव में है. उनके दादा शंभू रतन शुक्ला एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी रहे थे. वहीं, उनके पिता रामसुंदर नाथ शुक्ला एक जांबाज पुलिस अफसर थे, जिन्हें सेवा के दौरान 26 मेडल मिले थे. उन्हें यह विशेष सम्मान हासिल था कि वह आजीवन वर्दी पहनकर परेड में शामिल हो सकते थे. स्मिता की दो बेटियां कनाडा में और एक बेटा गुरुग्राम में रहता है.
एमएलसी चुनाव में मिली इस शिकस्त के बावजूद स्मिता मिश्रा के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं. उन्होंने ऐलान किया है कि इस हार से वह निराश नहीं हैं और अब उनका अगला लक्ष्य 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव है. बता दें कि साल 2014 में उन्होंने नवयुवक दल नाम से अपनी पार्टी का गठन किया था. स्मिता का दावा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी पूरे दमखम के साथ उतरेगी और कम से कम 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी.
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