देश की कोयला राजधानी धनबाद, जहां की धरती के नीचे सिर्फ काला हीरा ही नहीं, बल्कि रुद्रांश शर्मा जैसा नायाब हीरा भी मौजूद है. करीब चार साल की उम्र में उन्होंने स्कूल प्रतियोगिता में पहला मेडल जीता था. इसके बाद यह सफर लगातार आगे बढ़ता चला गया. हाल ही में ग्वालियर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की स्केटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर रुद्रांश ने कोयलांचल के साथ-साथ पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है.
बचपन से दिखा हुनर
रुद्रांश अपने माता-पिता के साथ धनबाद के बिनोद नगर में रहते हैं. उनके पिता का नाम रजनीश कुमार है.
रजनीश कुमार बताते हैं कि साल 2017 में, जब रुद्रांश करीब साढ़े चार साल के थे, तब उन्होंने मुंबई में स्कूल स्केटिंग प्रतियोगिता में मेडल जीता था.
कोरोना काल के दौरान पूरा परिवार मुंबई से धनबाद लौट आया. इसके बाद गोल्फ ग्राउंड में सीमित जगह पर ही स्केटिंग की प्रैक्टिस शुरू की गई. संसाधनों की कमी के बावजूद रुद्रांश ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
25 से 30 दिसंबर के बीच ग्वालियर में आयोजित राष्ट्रीय स्केटिंग प्रतियोगिता में रुद्रांश ने झारखंड का प्रतिनिधित्व किया. यह प्रतियोगिता भारत सरकार के खेल और शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जाती है.
इसमें उन्होंने 500 रिंक में ब्रॉन्ज और वन लैप में गोल्ड मेडल हासिल किया.
इसके अलावा सीबीएसई ईस्ट ज़ोन प्रतियोगिता में भी उन्होंने भाग लिया, जहां भारत के साथ-साथ ओमान, सिंगापुर, दुबई और मॉरीशस के स्कूलों के खिलाड़ी शामिल थे. इस प्रतियोगिता में रुद्रांश ने एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता.
सीमित संसाधन, लेकिन बड़ा सपना
स्केटिंग एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. आरसी भूषण बताते हैं कि स्केटिंग के लिए रिंक बेहद जरूरी है. बिना रिंक के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकते.
धनबाद के गोविंदपुर स्थित जीडी गोयनका स्कूल परिसर में रिंक का निर्माण किया गया है. झारखंड में दूसरा रिंक रांची के खेल गांव में बन रहा है, लेकिन वह अभी पूरा नहीं हुआ है.
वहीं स्केटिंग कोच अभिषेक कुमार का कहना है कि रुद्रांश में नेचुरल स्पीड और डेडिकेशन दोनों हैं. सही संसाधन मिलने पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नाम बन सकता है.
एशियन ओलंपिक में गोल्ड का सपना
रुद्रांश कहते हैं कि पहली बार चैंपियनशिप में खेलने के दौरान काफी घबराहट थी. अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ियों से मुकाबला आसान नहीं था. उन्होंने कहा कि झारखंड में स्केटिंग के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली, नोएडा, हैदराबाद और अन्य शहरों में ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता है.
रुद्रांश का सपना है कि वह एशियन ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतें. इसके लिए उन्होंने सरकार से स्केटिंग के क्षेत्र में बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी की है.
- सिथुन मोदक की रिपोर्ट
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