बिहार के रामनगर प्रखंड के सुदूरवर्ती दोन क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया. क्षेत्र के 22 गांवों के लोग नदी के पानी में उतरकर हाथों में अपने जनप्रतिनिधियों के ‘लापता’ होने के पोस्टर लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे. ग्रामीणों के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दोन क्षेत्र में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आखिर दोन को विकास करने के लिए कितना समय चाहिए
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों के हाथों में केंद्रीय राज्य मंत्री, बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य मंत्री सह रामनगर विधायक और सांसद की तस्वीरों वाले पोस्टर थे. ग्रामीणों ने इन पोस्टरों के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की. वहीं, प्रदर्शन के लिए लगाए गए बैनर पर लिखा था- लापता दोनवासियों का सवाल, इन लापता नेताओं से. बैनर पर नेताओं की तस्वीरों को इस तरह प्रदर्शित किया गया है कि आंख, कान और मुंह बंद. इसके जरिए ग्रामीणों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी समस्याओं को न देखा जा रहा है, न सुना जा रहा है और न ही उनकी समस्याओं पर बात हो रही है. बैनर पर ग्रामीणों की ओर से सवाल भी उठाया गया- आखिर दोन को विकास करने के लिए कितना समय चाहिए?
आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे 22 गांवों के लोग
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद कई दशक गुजरने के बावजूद दोन क्षेत्र के 22 गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में बेहतर सड़क की सुविधा नहीं है, बिजली की समस्या बनी रहती है और स्वास्थ्य सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में लोगों को छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है. दोन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण बारिश के मौसम में ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. नदी और खराब आवागमन व्यवस्था के कारण गांवों से बाहर निकलना चुनौती बन जाता है. सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर रूप से बीमार लोगों और मरीजों को होती है. समय पर अस्पताल पहुंचना कई बार ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. इन्हीं समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने इस बार अपना विरोध जमीन पर नहीं, बल्कि नदी के पानी के बीच खड़े होकर दर्ज कराया. हाथों में नेताओं के ‘लापता’ पोस्टर लेकर नदी में उतरने का यह तरीका इलाके की बदहाल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी को अलग अंदाज में सामने लाता है.
अच्छी सड़क, नियमित बिजली और समय पर इलाज की मिले सुविधा
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा या बड़ी मांग की जरूरत नहीं है. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि गांवों तक अच्छी सड़क पहुंचे, नियमित बिजली मिले और जरूरत के समय इलाज की समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो. ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से इन समस्याओं को लेकर आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है. ग्रामीणों के इस प्रदर्शन में सबसे बड़ा सवाल विकास को लेकर है. आखिर आजादी के इतने वर्षों बाद भी दोन के 22 गांव सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों इंतजार कर रहे हैं? ग्रामीणों ने अपने अनोखे प्रदर्शन के जरिए जनप्रतिनिधियों और सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने की कोशिश की है. अब देखने वाली बात होगी कि नदी के पानी में खड़े होकर लगाए गए ‘लापता’ पोस्टर और ग्रामीणों का यह सवाल जनप्रतिनिधियों तक पहुंचता है या नहीं, और दोन के इन 22 गांवों को बुनियादी सुविधाओं का इंतजार आखिर कब खत्म होता है.