बिहार के बगहा स्थित रामनगर के बहुचर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए पांच आरोपियों महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, मुशहर और गीता देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने सभी पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है.
और नहीं लौटे घर... मिला शव
यह मामला रामनगर थाना कांड से जुड़ा है. घटना 1 मई 2022 की है. विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया था. इसके बाद वह बाइक से घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे. परिजनों ने काफी तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी. घटना के करीब सात दिन बाद महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया. शव की पहचान अंगूठी और घड़ी के आधार पर की गई.
बहन ने रची थी हत्या की साजिश
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों को पेश किया. इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, पुत्र राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल, बरामद मोबाइल और बाइक समेत कई साक्ष्य अदालत में पेश किए गए. अभियोजन पक्ष के अनुसार, संपत्ति के लालच में गीता देवी ने अपने भाई विजय सहनी की हत्या की साजिश रची थी. इस मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका भी सामने आई.
मुख्य आरोपित अशोक यादव भी दोषी
लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि मामले के मुख्य आरोपित अशोक यादव को भी अदालत ने दोषी करार दिया है. अशोक यादव की सजा पर फैसला 11 सितंबर को सुनाया जाएगा. बहुचर्चित हत्याकांड में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा और मुख्य आरोपित को दोषी करार दिए जाने के बाद मामले में अदालत का फैसला अहम माना जा रहा है. यह संस्करण तथ्यों के क्रम और सजा की तारीख को अलग रखते हुए ज्यादा सही है.