बगहा के रामनगर में इन दिनों शाम होते ही एक अलग नजारा देखने को मिल रहा है. हाथों में डंडा और झाड़ू लिए महिलाओं का समूह गांव की गलियों में निकल पड़ता है. मकसद है- शराब के खिलाफ आवाज बुलंद करना और गांव के माहौल को बेहतर बनाना. मामला रामनगर प्रखंड के सोनख पंचायत के सिल्वटिया बड़गो गांव का है. यहां शराब की बिक्री और सेवन से परेशान महिलाओं ने खुद एकजुट होकर अभियान शुरू किया है. पिछले करीब एक सप्ताह से महिलाएं हर शाम समूह बनाकर गांव में गश्त कर रही हैं और शराब पीने-पिलाने का विरोध कर रही हैं.
चंद महिलाओं से शुरू हुआ अभियान, अब 50 से ज्यादा महिलाएं साथ
शुरुआत में कुछ महिलाओं ने मिलकर यह अभियान शुरू किया था. धीरे-धीरे गांव की दूसरी महिलाएं भी इससे जुड़ती चली गईं. अब 50 से ज्यादा महिलाएं इस मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं. महिलाओं का कहना है कि उनका मकसद किसी से विवाद करना नहीं, बल्कि गांव के माहौल को बेहतर बनाना और परिवारों को शराब के नुकसान से बचाना है. जीविका समूह की अध्यक्ष फूलकली देवी ने बताया कि घरों में शराब की वजह से बिगड़ते माहौल को देखते हुए महिलाओं ने यह कदम उठाया. उनके मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद बाहरी लोगों की आवाजाही भी कम हुई है.
रामनगर एसडीपीओ सतेंद्र राम ने बताया कि गांव की महिलाएं अब अवैध पदार्थों की बिक्री और खरीदारी को लेकर जागरूक हो रही हैं. महिलाएं इस तरह की गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. पुलिस भी ऐसी सूचनाओं पर कार्रवाई कर रही है और लोगों से अपील है कि वे अवैध पदार्थों की बिक्री या खरीदारी की जानकारी तत्काल पुलिस को दें.
शाम होते ही निकलता है महिला दस्ता
गांव में महिलाओं की टीम शाम होते ही सक्रिय हो जाती है. हाथों में डंडा और झाड़ू लेकर महिलाएं गांव की गलियों में घूमती हैं और लोगों को शराब से दूर रहने के लिए जागरूक करती हैं. महिलाओं का कहना है कि जब तक गांव में पूरी तरह बेहतर माहौल नहीं बन जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा. मुखिया रमिता देवी ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना की है. वहीं, नगीना देवी ने बताया कि कुछ महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां अब 50 से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच गया है.
महिलाओं के मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद गांव में शराब की बिक्री में कमी देखने को मिली है. अब महिलाएं इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि गांव के माहौल को बदलने की सामूहिक कोशिश मान रही हैं.
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