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22 साल की नौकरी छोड़, गांव लौटकर शुरू की रंगीन गोभी और काले धान की खेती... अब पहाड़ में कमा रहे लाखों रुपये!

मुंबई में 22 साल तक नौकरी करने के बाद गांव लौटे चंद्रशेखर ने खाली पड़ी जमीन को खेती के लिए तैयार किया और पारंपरिक फसलों के साथ आधुनिक व विविध खेती शुरू की. आज वे करीब 150 नाली जमीन पर फल, सब्जियां, दालें, औषधीय पौधे, काला धान और काला गेहूं जैसी फसलें उगा रहे हैं.

Chandrashekhar Pandey
जगदीश पाण्डेय
  • बागेश्वर ,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

पहाड़ों में खेती को अक्सर कम आमदनी और सीमित संसाधनों से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन बागेश्वर के चौरसों गांव के किसान चंद्रशेखर पाण्डेय ने इस सोच को बदलने की कोशिश की है. मुंबई में 22 साल तक नौकरी करने के बाद गांव लौटे चंद्रशेखर ने खाली पड़ी जमीन को खेती के लिए तैयार किया और पारंपरिक फसलों के साथ आधुनिक व विविध खेती शुरू की. आज वे करीब 150 नाली जमीन पर फल, सब्जियां, दालें, औषधीय पौधे, काला धान और काला गेहूं जैसी फसलें उगा रहे हैं.

चंद्रशेखर पांडेय पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे. लेकिन उन्होंने खेती में नए प्रयोग करने का फैसला किया. पिछले साल उन्होंने प्रयोग के तौर पर गुलाबी गोभी की खेती शुरू की. इसकी अच्छी पैदावार हुई और बाजार में भी इसकी मांग देखने को मिली. इसके बाद उनका भरोसा आधुनिक और विविध खेती पर बढ़ा.

रंगीन गोभी से बढ़ी कमाई
चंद्रशेखर के मुताबिक, पहाड़ की ठंडी जलवायु और उपजाऊ मिट्टी रंगीन गोभी की खेती के लिए काफी अनुकूल है. गुलाबी गोभी दिखने में आकर्षक होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है. सामान्य गोभी की कीमत कई बार बाजार में गिर जाती है, लेकिन रंगीन और पोषक गोभी की मांग अच्छी रहती है. इस साल वे पीली गोभी की खेती भी कर रहे हैं और उन्हें इससे बेहतर कमाई की उम्मीद है.

एक जमीन पर कई फसलें 
चंद्रशेखर की खेती की सबसे बड़ी खासियत विविधता है. वे एक ही क्षेत्र में अलग-अलग तरह की फसलें उगाते हैं. इससे किसी एक फसल के खराब होने या बाजार भाव गिरने का जोखिम कम होता है. फल, सब्जियां, दालें और औषधीय फसलों के साथ काले धान और काले गेहूं जैसी नई किस्मों पर भी वे काम कर रहे हैं.

पलायन के खिलाफ बनी मिसाल
चंद्रशेखर की कहानी पहाड़ से पलायन करने वाले युवाओं के लिए भी एक संदेश है. उन्होंने शहर की लंबी नौकरी छोड़कर गांव में स्वरोजगार का रास्ता चुना. उनका कहना है कि सरकार और उद्यान विभाग से भी उन्हें सहयोग मिल रहा है. विभाग की ओर से उन्नत किस्म के बीज समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. चंद्रशेखर की कोशिश दिखाती है कि सही योजना, मेहनत और बाजार की समझ के साथ पहाड़ की खेती भी अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है.

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